Section Insights
Introduction of New Teachers
Who are the new teachers introduced?
The section introduces Satish Babu, a new mathematics teacher, and Nirmal Ojha, a Hindi teacher, highlighting their recent qualifications and roles in the school.
- Satish Babu has just completed his degree from Madras University.
- He is taking over the mathematics subject from Birbal.
- Nirmal Ojha is introduced as the Hindi subject teacher.
Discussion on Knowledge and Humility
What is the importance of humility in teaching?
The conversation emphasizes that while being knowledgeable is important, humility is essential to avoid arrogance and to remain open to learning.
- Knowledge should not lead to arrogance.
- Humility allows for better learning and teaching experiences.
- Teachers should be open to the possibility of being wrong.
Inquiry About a Poem
Whose poem is being discussed?
The characters discuss a poem related to unity and youth, questioning its authorship and the significance of its message.
- The poem is about unity among the youth.
- There is a playful inquiry about the authorship of the poem.
- The characters plan to verify the poem's origin.
Seeking Answers from a Student
How will they find out the authorship of the poem?
They decide to write to a student at Delhi University to get confirmation about the poem's authorship, indicating a collaborative approach to learning.
- They plan to reach out to a student for clarification.
- Collaboration is emphasized in the search for knowledge.
- Waiting for a response is part of the process.
Engagement in Classroom Activities
What activities are planned for the classroom?
The characters discuss engaging in classroom activities, including singing and discussing poetry, to foster a lively learning environment.
- Classroom engagement includes singing and poetry discussions.
- The importance of active participation in learning is highlighted.
- Teachers encourage students to express themselves creatively.
Transcript
0:19 dudoocoerca
1:06 अरे अरे, सतीश बाबू आइए आइए, प्रणाम, प्रणाम, प्रणाम, धनंजय जी, इनसे मिलिए, ये हैं सतीश साहु मद्रास यूनिवर्सिटी से अभी अभी डिग्री पूरी करके आ रहे है। और हमारे विद्यालय में गणित विषय के नए कमांडर। बीरबल जी की जगह आप ही ले
1:24 रहे हैं जी सर।
1:26 और ये हैं धनंजय जी। विज्ञान विषय के गुरु प्रणाम, प्रणाम, प्रणाम, प्रणाम, इनसे मिलिए। ये हैं निर्मल ओझाजी, हिंदी विषय के अध्यापक बैठ और गुरुदेव। ये है सतीश बाबू। बीरबल जी की जगह गणित विषय का कमांड। यही ले रहे हैं।
1:50 ये।
1:50 ये सतीश बाबु क्या उम्र है आपके।
1:54 अगले महीने 26 की हो जाएंगे, सिर,
1:57 20 की उम्र में अध्यापक बन गए अरे भाई, इस उम्र में तो हम नालायक थे, इधरउधर भटकते रहते थे बस जी।
2:04 और इन्हें देखिये ये नौजवान बिल्कुल देश की शिक्षा व्यवस्था की सेवा में तत् पर
2:11 बाबू के लिए कुछ हो जाए जी।
2:13 बिलकुल नौजवान गाओ रे, नौजवान गाओ रे लो, कदम बढ़ाओ रे लो, कदम लाओ रे वतन के नौजवान, इस चमन के बागवान 1 साथ बढ़ चलो मुश्किलों से लड़ चलो, इस महान देश को और नया बना रे, नौजवान आवर, नौजवान व
2:41 रि, नौजवा क्या बाबा है।
2:46 धनंजय जी, कभी आते है, कभी जाते हैं, लेकिन कभी दिनकर जैसा पैसा, कभी कभी नहीं आएगा। यह बात तो है सर।
2:57 सर बात आपकी एकदम ठीक है। लेकिन अभी जो कविता आप सुना है, वो दिनकर जी की नहीं सतीश।
3:03 बाबू ये दिनकर जी के ही बोल हैं।
3:06 नहीं सर दिनकर जी की शैली कुछ और थी, उनका तरीका ही कुछ और था। सर ये नहीं
3:12 प्रभाकर जी, ये गणित के कमाण्डर है या हिंदी के गणित के हैं। सर आप कोई गलती तो नहीं कर रहे हैं।
3:22 एकदम नहीं सिर।
3:24 अरे भाई। तो गणित के कमांडर। राष्ट्र कभी दिनकर के विषय पर क्यूँ इतना ज्ञान दे रहे हैं? हमें?
3:34 नहीं सर ऐसी बात नहीं है। आर। आप देख लीजियेगा।
3:38 अरे इसमें देखना क्या है? मैं कह रहा हूँ न की दिनकर राष्ट्र कभी उन्हीं की। ये कविता है।
3:44 सर 1 बार देख ही लेने में क्या हक है। आप हिंदी के शिक्षक है, पर हो सकता है आप भी गलत हो।
3:49 देखिये मैं शिक्षक जरूर हूँ, लेकिन आपकी तरह शिक्षक होने का घमंड मुझ में नहीं है। समझे आप मैं हिंदी का समर्पित शिष्य और मुझे शिष्य होने का घमंड है।
4:03 सिर घमंड तो किसी भी बात का कैसा भी बुरा है।
4:05 देखिये अगर इंसान में घमंड न हो तो आते जाते कोई भी उसकी बात काट सकता है।
4:10 सिर आते जाते ऐसी क्या मतलब है। आप का कहना है, हम मद्रास गए पढने के लिए। ताकि वापस आकर। आपकी बात काट सके। जिस प्रकार आपको अपने दावे पर घमंड है, उसी प्रकार हमे भी अपने दावे पर भरोसा है।
4:21 अच्छा आपको अपनी बात इतना भरोसा है कि 1 हिंदी के मजे हुए विद्यार्थी के आगे करें सतीश जी। 1 बात सुन लीजिये, आपको खुद अपने दावे पर भरोसा नहीं, केवल घमंड है कि आप गलत नहीं हो सकते।
4:38 सिर हमने ऐसा कभी नहीं कहा की हम गलत नहीं हो सकते। हमने केवल यह कहा कि हमें आपका
4:42 दावा गलत लग रहा है कि आधार आरोप सर।
4:46 अगर आप इस प्रकार बात करेंगे और कुछ सुनने को तैयार नहीं है, तो इस संवाद का कोई औचित्य नहीं है।
4:57 धनंजय जी, ये आज कल के नौजवान मुट्ठी भर का ज्ञान तो रखते नहीं हैं और शिष्टाचार का गला में लगे रहते हैं। अरे आज तक किसी ने मेरे सवाल और यह क्या किया?
5:15 सर हमारे ज्ञान पर संदेह करना, बिना किसी आधार पर आपके घमंड का परिचय देता है। और जो हमने दुस्साहस किया है, न आपकी बात काटने का, उसका आधार हम अभी दिए देते हैं। नौजवान आओ रे, नौजवान गाओ रे लो कदम बढ़ाओ रे लो कदम मिलाओ रे ऐ वतन के नौजवान। 1 चमन के बागवान 1 साथ बढ़ चलो मुश्किलों से लड़ चलो इस महान देश को तुम नया बनाओ रे, नौजवान आओ रे नौजवान गाओ रे, धर्म की
5:42 दुहाइयां प्रांत की जुदाईया भाषा की लड़ाइयाँ पाट 2 ये काया 1 माँ के तुम हो लाल 1 निशान उठाओ रे, नौजवान आओ रे, नौजवान गाओ रे। 1 बनो नेक बनो, खुद की भाग्य रेखा बनो सर्वोदय के तुम होलाल तुम से ये जग निहाल शांति के लिए, जहां को तुम जगाओ रे, नौजवान आओ रे नौजवान गाओ रे
6:13 मां निहारती तुम्हें माँ पुकारती तुम्हें श्रम के गीत गाते जाओ हँसते मुस्कुराते जाओ कोटी कंट एकता के गीत गाँव रे नौजवान और नौजवान गाँव रे।
6:28 यह पूरी कविता सुना कर आप क्या साबित करना चाहते हैं कि कहीं आपने ही तो नहीं लिखी
6:38 सिर हमारे पास?
6:39 न।
6:40 इस वक्त केवल ये आठाना है। अगर हम गलत साबित हो गए तो
6:44 ये भी आपके बेटा। अभी अभी नौकरी लगी है, तनखा बी नहीं मिली, गाँव बसने से पहले लूटेरों को दावत मत।
6:55 2 लेकिन गुरुदेव पता कैसे चलेगा कविता किसकी है, प्रिंसिपल मैडम हिंदी में है। तू क्यो न उन्ही से चल कर पूछ लिया जाए। हाँ ठीक रहेगा। हाँ, तो चलिए चलिए चलते हैं। चलिए
7:27 प्रणाम।
7:28 अरे ओझा जी। अरे आज क्या बात है प्रणाम मैडम प्रणाम पूरी बटालियन आ गई, सब ठीक है। अरे बैठिए। ओझा जी बैठ
7:47 मैडम, ये सतीश बाबू है, नए नए आए हैं विद्यार्थियों को
7:52 गणित पढ़ाने और हमें हिन्दी अरे कोजा जी। इनकी नियुक्ति हमीं ने तो की है सतीश बाबू को, तो जानते हैं आइए। सतीश बाबू बैठे बैठे खड़े क्या है जीवन, क्या बात है ओझा जी।
8:07 मैडम। 1 बात बताइए नौजवान आओ रे, नौजवान गाओ रे। ये किसकी कविता है।
8:14 इसके लिए ओझा जी हमको आश्वस्त होना पड़ेगा पढ़ना पड़ेगा 1 दिन दे दीजिये।
8:19 फिर अरे सतीश बाबू आप ही बताइए न। किसकी कविता है ये।
8:24 दुश्यंत कुमार हमारे हिसाब से। दुष्यंत कुमार जी की ये हिसाब का
8:29 क्या मतलब साफ़ साफ़ क्यों नहीं कहते है पहेलियां क्यों बुझा रहे हैं आप?
8:33 ओझा जी का मानना है की यह कविता भी दिनकर जी की लिखी हुई है।
8:37 ओझा जी, हमारे जानकारी के अनुसार सतीश बाबू बिल्कुल सही कह रहे हैं। यह कविता जो है दुश्यत कुमार जी की ही लिखी हुई है।
8:44 है न मैडम, मैं नहीं मानता मैं राष्ट्र की दिनकर जी का भक्त हूँ। मुझसे ये गलती नहीं हो सकती।
8:52 अरे गलती क्यूँ नहीं हो सकती भाई। किसी से भी हो सकती है। गलती।
8:55 अरे आप खुद ही स्वस्थ नहीं है। मैं कैसे मान लूं।
8:58 अरे तो इसमें फायर होने की क्या बात हो गयी भाई?
9:00 हाँ बात है मैडम आप मेरी बात का रहे हैं। क्या केन है गणित गुरु होकर हिंदी साहित्य पढ़ा रहे है। हमें।
9:09 अरे ओझा जी शांत हो जाइए, शांत हो जाइए। समझे ऐसा लग रहा है जैसे आज आपके मुँह से गोली ही चल पड़ेगी।
9:16 मैडम सतीश बाबू का आठाना दाँव पर
9:19 लगा हुआ है, है दाँव पर लगा हुआ है।
9:23 मैंने अपने दावे पर पूर्ण विश्वास है। इसलिए आना दाव पर लगा दिए।
9:29 तो खोजाजी इस सवाल का जवाब तो पूरे जिले में ढूंढने से नहीं मिलेगा। और अगर हम ढूंढने निकल पड़े तो हम सबके न बाल झड़ जायेंगे। तो ऐसा करते हैं। दिल्ली यूनसिटी में हमारे सुपुत्र जो है, ब्रिन है, उनको खत लिख कर पता कर लेते हैं। वो सबूत समेत हमें जवाब भेज देंगे। तब तक हम लोग इंतज़ार करते हैं। है न?
9:55 हाँ
9:57 क्यूँ ओझा जी,
9:59 ठीक है मैडम हम इंतज़ार करेंगे। आपके सुपुत्र के जवाब का
10:05 ठीक है न?
10:06 सतीश बाबू बहुत बहुत धन्यवाद।
10:08 चलिए
10:21 1 तराजू, से रा रे
10:27 1
10:28 तराजू, मे रा रे 1 ही घर में 4 तराजू। यह कैसा है। फिर अरे गुरु जी, अरे गाते रहिये, गाते रहिये, सतीश बाबू रुक, नही सर, अरे बाद विवादी मसला चाहे, अरे दिन हो चाहे रात रे
10:58 और बरसाती में डर के जैसे मारे। 1 हू।
11:09 क्या बात है।
11:09 गाना तो हमेशा गाते रहना चाहिए। सतीश बाबू क्या भाई क्या है गुरूजी
11:15 प्रिंसिपल मैडम ने देने को कहा है। बोला है की दिल्ली से आया है,
11:20 दिल्ली से क्या आया? भाई क्या चीज है। इसमें।
11:25 देखिए सर प्रमोशन होगा।
11:27 अरे भैया इस बुढ़ापे में कहा प्रमोशन होगा।
11:30 सतीश बाबू
11:34 नौजवान आओ रे, नौजवान गाओ रे लोग, कदम बढ़ाओ रि लोग, कदम मिलाओ रे।
11:41 प्रिंसिपल मैडम के पुत्र का पत्र पूरे, ब्रह्माण का चक्कर करके आखिरकार आज आ गया। जी आ गया, क्या बात है।
11:52 सदीश बाबू जी हो जाए।
11:56 हमारा आना कब से तैयार है।
11:59 ये लीजिये देखिये, आपका सिर्फ दाव नाइंसाफी होगा। मेरी आप भी अजी बिल्कुल पीछे क्यों
12:07 रहूँ, मैं क्या बात है, डबल कमाई
12:10 कहा
12:14 छुट्टी खोले खोलता है।
12:16 देखिये, अब तो खोल नहीं पड़ेगा। सतीश बाबू आपने क्या दाव लगाया था।
12:32 हम सब दुश्यंत कुमार कहे थे। और हमने आप तो श्री रामधारी सिंह दिनकर जी का नाम लिए थे।
12:40 सतीश बाबू नौजवान आओ रे, ये बाल कभी बैरागी का है जी, ये देख लीजिये, क्या बात कर रहे हैं। और हमारी मैडम ने क्या हा था।
12:55 सिर मैडम तो हमारे साथ दिए, आपका साथ दिया।
12:58 तो चलिए उनकी क्लास लेते हैं। आप का साथ दिया उन्होंने। देखिये उनका साथ कौन देता है।
13:05 ये लीजिये सर आपकी ने हैँ।
13:07 आप अपनी भी उठाइए चलिए जरा।
13:09 लेकिन सर गलत तो साबित हो गया।
13:11 अरे भाई बुजुर्गी है।
13:13 अभी दिनकर जी की कविता नहीं निकाली।
13:15 देखिये दुशयंत की भी तो नहीं निकाली वो बात सही है सर हमने तो
13:20 कहा ही था दवेवादी मसला चाहे दिन चाहे हो रात रे हो दिन चाहे हो रात रे बरसाती मेंढक के जैसे मारे हूँ कार रे हो, मारेक हूँ कार रि
13:52 उन बिन तेरा मूल नहीं है तुझ पे न हो भी सुने कल से कल की आज की गाड़ी दोपह दमदार रि दोई दमदार रे
14:39 भटकेसुगुमानके बदले कर दे तो मन मानी अपनी दी की क खीर में तू भर दे थोडा पानी 2 भर के सुगमा बदले तो मनमानी अपनी तीखी खीर में तू भर दे थोडा पानी नंगी बसती है हसती ग समझे की परछाई
15:09 पे कम चल्ली कुंडा करदी बातें हाथ, कई रि बातें हाथ कराई रे बना ना कुछ बोला जाये दिन चाहे हो रात, दिन चाहे हो रात रात के बाद मसला
15:39 चाहे दिन चाहे हो रात रे, दिन चाहे हो रात रे।
Summary
- Satish is introduced as a young math teacher who recently graduated and is eager to contribute to education.
- A debate arises over a poem attributed to either Dushyant Kumar or Ramdhari Singh Dinkar, showcasing differing opinions among the teachers.
- The conversation reflects a clash of confidence and knowledge between the older and younger teachers, with Satish defending his stance.
- The principal suggests verifying the poem's authorship through her son at Delhi University.
- The dialogue emphasizes themes of pride in knowledge, the importance of education, and the respect for literary heritage.
- The teachers engage in light-hearted banter, revealing camaraderie despite their disagreements.
- The discussion illustrates the challenges and dynamics of teaching in a changing educational landscape.
Questions Answered
Who are the new teachers introduced?
The section introduces Satish Babu, a new mathematics teacher, and Nirmal Ojha, a Hindi teacher, highlighting their recent qualifications and roles in the school.
What is the importance of humility in teaching?
The conversation emphasizes that while being knowledgeable is important, humility is essential to avoid arrogance and to remain open to learning.
Whose poem is being discussed?
The characters discuss a poem related to unity and youth, questioning its authorship and the significance of its message.
How will they find out the authorship of the poem?
They decide to write to a student at Delhi University to get confirmation about the poem's authorship, indicating a collaborative approach to learning.
What activities are planned for the classroom?
The characters discuss engaging in classroom activities, including singing and discussing poetry, to foster a lively learning environment.