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0:00 आप धर्म योगी कब कैसे क्यों बने? क्योंकि इतनी छोटी सी उम्र में आपमें यह त्याग की भावना क्यों जागी? आप साइंस के स्टूडेंट थे तो साइंस और धर्म यह कैसे मिलाप हुआ?
0:14 देखिये, सबसे पहले हम लोगों को धर्म समझना पड़ेगा। भारत की परंपरा को अगर आप जानना चाहेंगे तो भारत ने केवल उपासना विधि को धर्म नहीं माना है, कर्तव्य और सदाचार को, धर्म को का 1 रूप माना है। और धर्म को से जोड़ कर के देखा है। धर्म
0:46 1 व्यवस्था है, 1 वे ऑफ़ लाइफ है। जिसको आप 1 जीवन पद्धति कह सकते हैं। वह जीने की 1 कला है। विज्ञान उसके उन्यन का 1 माध्यम है। अध्यात्म उसकी चरम, स्थिति यानि साइंस
1:16 उसका 1 बहुत छोटा सा पार्ट है। हम जब भौतिक दृष्टि से देखते हैं तो साइंस का 1 अन्वेषण होता है, 1 एक्सपेरिमेंट हो जाता है। लेकिन जब चेतना का विस्तार हम करेंगे तो चेतना का वह विस्तार अध्यात्म की 1 नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा, जहाँ पर व्यक्ति
1:48 किसी कार्य का केवल सरिष्टा ही नहीं बनेगा, बल्कि उसका दृष्टा भी बन सकता है। और यही वैदिक कृषि ने किया था। इसलिए स्वाभाविक रूप से 1 सीमित क्षेत्र और 1 सीमित भूमिका के साथ आगे जानने की बजाय उसमें स्वयं प्रवेश करके देखो क्या है तो बहुत कुछ देखने को मिला है। है तो उन चीजों को लेकर। इसलिए
2:19 मैंने आध्यात्म का सहारा लिया और उससे आगे बढ़ कर के फिर उस अन्वेषण की यात्रा हमारी लगी हुई साइंस के स्टूडेंट के साथ साथ 1 योगी के रूप में उस दिशा में आगे कार्य कर रहे हैं।
2:33 नाथ समुदाय के बारे में कुछ बताइए हमें कि उसमें ऐसी क्या बात जीत थी कि जो आप इतनी कम आयु में आप जुड़ गए। उस समुदाय से।
2:42 देखिये नाथ सम्प्रदाय भारत का राचीन संप्रदायों में से 1 है। यह भारत की 1 उस विशिष्ट साधना पति का प्रतिनिधित्व करता है जो वास्तव में व्यावहारिक ता को लिए हुए है और व्यवहारिक दृष्टि है। यद्यपि सभी संप्रदायों के अपने अपने दर्शन हैं,
3:12 अपने अपने मंत्र हैं, अपने अपने पद्धतियां हैं, सब में श्रेष्ठता है। और उसमे मुझे जो उचित लगा। मैंने उस समय वो किया और उस समय के जो जो सर्वश्रेष्ठ संतों की परंपरा थी, महनतवेदेनाजी महाराज को मैंने। अपने पुज्य गुरुदेव के रूप में चयन करके मैंने उनसे देख।
3:39 साली गुरु 1 गुरु का मिलना वो भी 1 मैटर लख, फेट कहिए तो आप जब आप मिले उनसे तो आपको। उस वक्त उसी वक्त पता लग गया था कि ये मेरे गुरु बनेंगे।
3:53 देखिये पता किसी को नही लगता है और ये लग भी नहीं है। यह जन्म जन्मांतर का प्रारब्ध है और यह उसी के साथ जुड़ता है। देखिये आप जिस घर में पैदा हुए हैं तो आप लिख के थोड़े गए थे, आपका प्रारब्ध था। आप एन आई के माध्यम से कार्य करेंगे, जन सेवा का कार्य करेंगे। यह भी 1 प्रारब्ध है।
4:26 ऐसे ही ये हर 1 व्यक्ति के साथ जुड़ा हुआ है। उसके लिए हमें चेतना को अपने विराट विस्तार देना होगा। समझ में सब आ जाएगा।
4:37 तो जब आप अपने घर में बताया कि मैं गुरु से मिला हूँ, मैं घर छोड़ के त्याग की जिंदगी बिताना चाहता हूँ। तो घर में रिएक्शन क्या हुआ?
4:46 नहीं देखिये कोई माँ बाप इसके लिए अपनी सहमति नहीं देता है। क्योंकि उनका अपना 1 दायरा है, उनका 1 दायरा है, जो उनका 1 सीमित क्षेत्र है। उस सीमित क्षेत्र को, उसी को बंधन कहते हैं। हमारे यहाँ कहा गया न, मन एवं मनुष्य नाम कान बंद। मोक्स व्यक्ति के बंधन और मोक्ष का कारण उसका मन है। जो सोचता है कि मैं जो है मैं, मेरा
5:17 परिवार। ये जब भावना आती है न, तो व्यक्ति उस तक सीमित रहता है। और यही उसके बंधन का कारण है। जो उस बंधन को तोड़ कर के बाहर निकालता है, वही उसकी मुक्ति का माध्यम बनता है, उसके मोक्ष का कारण बनता है। और उस बंधन को जो भी तोड़ेगा, यह बंधन हर 1 क्षेत्र में व्यक्ति के जीवन में आते हैं। 1 विद्यार्थी अगर अपने बंधन को नहीं तोड़ेगा। 1
5:47 क्लास में कहेगा की नहीं मुझे तो इसी क्लास में रहना। क्योंकि मुझे अच्छा लगता है, क्या वह अगली क्लास में जा पाएगा? नहीं जा पाएगा। 1 शिक्षक कहेगा की नहीं मुझे। तो जहाँ नियुक्ति मिली है, मैं उसी रूप में या कोई कार्मिक इसी रूप में कहेगा मुझे वही काम करना है? क्या वह आगे बढ़ पाएगा? नहीं बढ़ पाएगा? उसको 1 बंधन तोड़ना होता है। 1 क्लास में क्लास के बंधन को तोड़ कर के अगली क्लास में
6:13 जाता है, उसका प्रमोशन होता है। तो हर 1 व्यक्ति के जीवन में इस प्रकार की स्थिति आती है।
6:19 1 धर्म योगी से आप फिर राजनीति में आये, उस सफ़र के बारे में बताए और 1 और सवाल मेरे मन में उठ रहा था। जैसे आप बता रहे थे कि 1 इंसान जो दुनियादारी और यू नो बंधनों से आप निकल चुके हैं, तो उस बैराग्य से आप। अगर राजनीति में आते तो उसमे कॉन्फ्लिक्ट नहीं हुआ?
6:43 आप में देखिये, यही अंतर है। धर्म योगिनी, योगी, योगी होता है और मैं 1 योगी हूँ। धर्म का मतलब केवल पूजा पद्धति नहीं
6:56 है, कर्म भी
7:00 धर्म। 1 समग्र जीवन की पद्धति है। धर्म कर्तव्य के पद की प्रेरणा देने वाला, उस पद का क्यो अग्रसर करने वाला, आग्रही बनाने वाला, 1 मार्गदर्शक है। हम उसको केवल पूजा पद्धति तक सीमित नहीं कर सकते। 11 योगी के रूप में
7:33 1 परिवार के बंधन को तोड़ करके समाज के इस विराटता के साथ अपना जुड़ा हुआ है। इसलिए उस विराटता के साथ जोड़ कर के अपने आप को कार्य करना दूसरा। 1 योगी का मतलब यह नहीं कि वह केवल अपने स्वयं के मोक्ष प्राप्त करने के लिए आध्यात्मिक लाभ के ले,
8:06 वह अपने आप को सीमित कर ले। अगर समाज के सामने चैलेंज है, कोई चुनौती है तो चुनौती से जूझने के लिए भी अपने आप को तैयार करें। याद रखना, साधना की जो सबसे पहली पद्धति आती है, उसमें सेवा है। भक्ति के मार्ग का भी जो नौधा भक्ति की व्यवस्था की गई है, भारत के संतों ऋषियों ने उसमें पहला मार्ग सेवा है। कोई भी साधक
8:37 सन्यासी योगी बनता है तो उसके लिए सेवा के मार्ग का अनुसरण करके ही आगे की दिशा का मार्ग प्रसस्त हो पाता है। हम लोग भी जब 1 योगी के रूप में सार्वजनिक जीवन में आये तो सार्वजनिक जीवन में किसी पद या प्रतिष्ठा के लिए नहीं, बल्कि इस कार्य के लिए आए कि नहीं। यह 1 सेवा का माध्यम है। और हम समाज के अंतिम पायदान पर बैठे हुए व्यक्ति की सेवा
9:08 इस पद पर रह कर के अंतिम उदय कर सकते हैं और उसी लक्ष्य को लेकर के व्यक्ति कार्य करता है।
9:14 जी, मैं फिर से उसी बात पर आउंगी जब आप घर छोड़ कर निकले थे। अभी हाल ही में हमने देखा 1 फोटो आपने ट्वीट किया था, और वो वायरल भी हो गया था। जब आप अपने माता से मिलने गए थे तो उस वक्त आपको कैसा लगा जब आप गए तो देखिये मैं कई
9:30 वर्षों के बाद गया था जी, मेरे पिता जी का जो है देहांत 2 हज़ार 20 में हो गया था मैं उससे पहले उनसे या उसे अपने परिवार के लोगों से कई वर्षों से नहीं मिल पाया था, समझोकसेकरोनाकाल खंड प्रारंभ हो चुका था, लॉक डाउन प्रारंभ हो चुका था। तो उनके अंतिम संस्कार कार्यक्रम में में भाग नहीं ले पाया था।
9:56 आपके पिताजी के है।
9:58 तो मुझे जब गत वर्ष अवसर मिला था, तो मैं अपनी माँ से मिलने के लिए जरूर गया था। तो स्वाभाविक रूप से 1 माँ और पुत्र के बीच में जो संवाद होने चाहिए, वही संवाद वहाँ पर हुआ।
10:12 आप उनके अंतिम संस्कार के लिए नहीं जा पाये। पर जब वो आपसे मिलने आते थे, आप उस वक्त चीफ मिनिस्टर थे, तो वो 1 आम नागरिक की तरह आते थे, सीएम के पिता के रूप में
10:23 नहीं आते थे, यहाँ वो कभी नहीं आये। वो मुझसे मिलने के लिए। मेरी 1 बार उनसे मुलाकात हुई थी, नजीमा बाद में, बाद में मैं 1 चीनी मिल के उद्घाटन में गया था। तो भाषण करते हुए मैंने देखा सामने जो है कोई बैठा है, तो मैं पहचान गया उनको मैंने कभी मेरे पिता जी है, लगता है सभा के बीच में बैठे हुए थे। तो फिर मैंने सभा समाप्त होने के बाद अपने साथ के कुछ लोग आये
10:53 हैं, उनको बुलाओ थोड़ा मुलाकात करते हैं हम, तब मेरी मुलाकात हुई थी जी,
11:00 आपकी छोटी बहन जो हैं। उन्होंने 1 इंटरव्यू में कहा था कि 30 साल उन्होंने आपको राखी नहीं बांधी 2022 में 1 इंटरव्यू में। उन्होंने कहा कि कई वर्ष पहले जब उन्हें पता लगा कि आप घर छोड़ के आप योगी बनने के लिए निकले हैं, तो उन्होंने कहा कि वो भिक्षा मांगने वाले संतों में आपको ढूंढ रही थीं, और मिले नहीं आप, उन्हें बहुत मुश्किल हुआ होगा। न?
11:25 उन्हें देखिये, ये सबके जीवन में आता है, लेकिन मुझे लगता है कि इन चीजों को हमें जो है, केवल अपने स्वयं के स्मरण के लिए रखना चाहिए, और स्वाभाविक रूप से सबके जीवन में आता है। कई वर्षों के बाद, जो है, चीजें चलती रहती है, और मुझे लगता है, यही जीवन है।
11:50 मैं 1 इंटरव्यू का 1 सर्प पढ़ना चाहती हूँ। सिर, क्योंकि ये हिंदी अखबार में छपा था। और हमारे कई दर्शक हैं जो इंडिया से बाहर रहते हैं। वो शायद उन्होंने पढ़ा नहीं होगा। ये पढ़ के मुझे बहुत कठिन लगा। जब मैंने पढ़ा तो कैसे महसूस कर रही होंगी। वो उन्होंने मैं पढ के सुनाती हूं। उसने। उन्होंने कहा। योगी के मुख्यमंत्री बनने के बाद कई लोग कहते थे कि आपको शर्म नहीं आती, आप मुख्यमंत्री की बहन हैं
12:20 और बहन होकर आप चाय की दुकान चलाती हैं, इन हालतों में रहती हैं। मैं उनको 1 ही बात कहूंगी। मैं गरीब हूँ, यह मेरा नसीब है। शर्म तब आनी चाहिए जब आप कोई गन्दा काम कर रहे हो, किसी के हक को छीन कर खा रहे हो। मैं तो मेहनत करके अपनी गुजर बसर करती हूँ।
12:42 ठीक बात है।
12:44 मैं इसलिए पूछ रही हूँ, सिर क्यूँकी? आमतौर पर लोग समझते हैं, न की चीफ मिनिस्टर हो या फिर स सांसद हो, विधायक हो, इनके इर्दगिर्द लोग जो हैं, इतने धनी हो जाते हैं, और फिर सार्वजनिक जीवन में इसलिए आते हैं कि जो धन कमा चुके हैं, उसे प्रोटेक्शन के लिए। और 1 ये इंटरव्यू है आपकी बहन का।
13:05 देखिये, व्यक्ति को कभी भी धन और वैभव संतुष्टि नहीं दे सकती। और मुझे लगता है कि सबसे बड़ा योग्य वह है जो स्वयं की मेहनत से संतुष्ट है, स्वयं के परिश्रम से। संतुष्ट है दूसरों की मेहनत से कुछ प्राप्त करना और फिर उसको छीन लेना। यह तो डकैती है। उसके अलग अलग रूप देख सकते हैं आप समाज में।
13:36 और मुझे लगता है सबसे निंदनीय कर्म यही है। और यही अंतर है। 1 योगी और 1 सांसारिक मनुष्य में, 1 सांसारिक। मनुष्य के बारे में शास्त्रों में कुछ बातें कहीं गई हैं कि वह त्रतिया अवश्य करेगा, हमेशा भ्रमित होगा। तीसरा, वह हमेशा उसके मन में दूसरों को धोखा देने की प्रवृत्ति होगी।
14:07 और चौथी बात उनके लिए जो कही गई है, वह कही गई है कि वह अपनी सीमित दृष्टि से भविष्य का अनुमान नहीं लगा पायेगा। इसलिए जो है सारा, दंद तो इसी का है।
14:29 पर आपकी तो जैसे आपकी तो ट्रेनिंग हुई गी न, गुरुजी ने आपको सिखा
14:33 होगा, मैं क्या कह रहा है।
14:34 लेकिन हम लोग उनका तो कुछ नहीं न।
14:36 आपइसलिएरकेइसलिए इतने मैं क्या क्या कह रहा हूँ न। हर व्यक्ति अपने आप में 1 योगी बन सकता है, 1 योगी बनने के सामर्थ ले सकता है अपनी मेहनत से, अपने कर्मों से, हम जो कुछ अर्जित करे, मैं भी भूखा न रहूँ, साधु, न भूखा जाए। अगर ये भाव हर व्यक्ति के अन्दर आ जाए, तो फिर यह समग्रता सबकी संतुष्टि
15:06 का कारण बन सकता है, सारे विवादों का समाधान कर सकता है।
15:09 जब आप पीठा देश बने, आपके भारत में और भारत से बाहर भी इतने अनुयायी है, तो उस वक्त आपको क्या? ऐसा किसी ने कहा की आप पीठा देश होकर भी तो सार्वजनिक कार्य कर सकते हैं, राजनीति में क्यों उतर रहे।
15:23 कोई बंधन थोड़े है, यह कोई बंधन किसी के लिए नहीं है, हम मनुष्य पहले है, उसके बाद योगी हैं। यह सन्यासी है। और मैंने आपको बताया न कि 1 योगी के रूप में समाज के प्रति जो मेरे कर्त्तव्य हैं, उन कर्तव्यों का निर्वोहन करूँ। मैं सेवा को, धर्म का, धर्म को में सेवा का माध्यम बनाओ, इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है?
15:54 और हम वही कर रहे हैं।
15:55 तो 1 सन्यासी का कर्तव्य क्या होता है? क्या वही जो 1 जो कर्म कर रहा है, चाहे पत्रकार हो या फिर
16:03 राजनीति है, हर व्यक्ति, हर जीवन, हर व्यक्ति कर सकता है, हर व्यक्ति कर सकता है। आप मुझे 1 बात बताइए की सबसे बड़े जो है मीडिया के रिपोर्टर के रूप में। अगर आप तुलना करे तो महर्षि नाराजी थे, आप मुझे है थे की नहीं थे नारी रिपोर्ट चलिए सबसे बड़ी रिपोर्ट देते
16:34 कि वह हर लोक की सूचना, इस लोक में, इस लोक की सूचना दूसरे लोगों तक पहुँचा देते थे। वो क्या थे? वो सन्यासी तो थे और मै। 1 बात बताओ की सन्यासी ने किस में अलग अलग क्षेत्रों में प्रवेश करके कार्य नहीं किया हो। मैंने तो पत्रकारिता का उदाहरण आपके सामने दे दिया है। और भी उदाहरण हैं। बहुत सारे ऐसे उदाहरण है। तो इसको आप कैसे कह सकते हैं, कैसे कह सकते हैं कि नहीं?
17:04 वे धर्म के बारे में आप कह रहे थे कि वे ऑफ लाइफ, पूजा पाठ के साथ न जोड़ा जाए, उसे अलग भी देखना चाहिए। 1 बार आपने कहा था, लेकिन आपके साथ जैसे आपकी जो वेश भूषा है। इसलिए क्या लोगों ने आपको ये नहीं कहा कि अब आप सन्यासी की वेशभूषा जो है वो अलग कर दीजिये। अब आप राजनीति में जा रहे हैं, संसद में जा रहे।
17:28 हमारे यहाँ, हमारे यहाँ कोई ड्रेस कोड पॉलिटिक्स में नहीं है, ड्रेस कोड इसमें नहीं होता था।
17:34 न सफेद पोषाक पहने हुए है, तो गांधी टोपी पहन लिया और है पहले
17:39 उसका स्किन रूप आचरण भी करे। न देखिये यह बेसवुषा हमारी इस लिए है लोगो की दृष्टि में हमेशा बने रहे और लोग हमारे विचलन पे उंगली भी उठा सके और विपरीत परिस्थिति में साथ खड़े भी हो सके। और इसीलिए इस प्रकार की वेश भूषा को 1 चैलेंज के रूप में स्वीकार किया जाता है। हमेशा कैसे ये 1 दृष्टि भी देती है और साथ साथ
18:09 व्यक्ति को पतन के गर्त से बचाने के लिए भी उसे हमेशा सचेत भी करती है और इस दृष्टि से हम लोग हमेशा उसके
18:17 प्रति कैसे चैलेंज समझी।
18:19 नेगी चैलेंज इसलिए है क्योंकि जो व्यक्ति इससे पहले जो आपने नेता की परिभाषा की है उस भेष भूषा में रहते थे, उनके कर्मों को भी दुनिया जानती
18:34 है,
18:37 दुनिया ने सब कुछ देखा है, अपनी आँखों से देखा है और हमारे सामने भी चैलेंज है की हमें अपने आप को परफॉर्म करके साबित करना है जिससे हमारी पार्टी को, हमारे नेतृत्व को और हमारे स बाना को भी कटघरे में न खड़ा होना पड़े।
19:00 जब आप भगवा वस्त्र धारण करके आप संसद में जाते हैं और उसके बाद आप चीफ मिनिस्टर बनते हैं तो 1 ग्रुप है जो समझता है कि यह बहुत ही राइटविंग है। यह बहुत ही हिंदुत्ववादी हैं और हर चीज को भगवा कर दिया है। तो फिर मतलब इस ओनली फॉर हिंदुस ही चीफ। मिनिस्टर ओनली फॉर हिंदुस, ये इंटरनेशनल भी लिखा जाता है। अखबारों में ओपेड एडिट्स आते हैं कि यह बहुत ही एक्सट्रीम राइट विंग है। एक्सट्रीम हिंदुत्ववादी
19:27 हैं। उनके कपड़ों से ही पता लग रहा है कि हर चीज भगवा है।
19:32 देखिये मैं पिछले सवा 6 वर्ष से अधिक समय से उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री हूँ जी, हमारी पार्टी और हमारे नेतृत्व ने मुझे 2017 में मार्च 2017 में दायित्व दिया था। और 2017 से उत्तर प्रदेश में कोई दंगा तो नहीं हुआ। मुझे 1 बात बताइए दंगा होता था तो केवल हिंदू मरता था, क्या केवल हिंदू की संपत्ति जलती थी? अगर दंगा
20:02 होता था, अगर हिंदू मरता था तो मुस्लिम भी मरते थे, हिंदू व्यापारी की संपत्ति जलती थी तो उसके सटे मुस्लिम व्यापारी की संपत्ति भी जलती थी। अगर गुंडे किसी हिन्दू बेटी के लिए खतरा थे तो मुस्लिम बेटी के लिए भी उतना ही खतरा था कर्फ्यू लगता था और व्यापार प्रभावित होता था तो व्यापार तो पूरे बाजार का और पूरे मार्केट प्रभावित होती थी। न 1 व्यक्ति नहीं प्रभावित होता था,
20:33 प्रेसेप्शन खराब हुआ था तो यूपी का खराब हुआ था। न पहचान का संकट यूपी के हर नागरिक के सामने आया था। न केवल हिंदुओं के सामने नहीं आया था। इसलिए यह 1 स्थिति है। 6 वर्ष में दंगा नहीं हुआ है। यूपी में। 6 वर्ष में कोई दंगा नहीं हुआ, 6 वर्ष में कोई कर्फ्यू नहीं लगा। 6 वर्ष में सारे, पर्व और त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुए।
21:03 ये बड़ी बड़ी बातें करने वाले लोग देखे तो कैसे? चुनाव होने नगर निकाय का चुनाव पंचायत चुनाव, यूपी का, विधानसभा का, चुनाव यूपी का और वेस्ट बंगाल में भी पंचायत के चुनाव हुए थे। क्या हाल हुए थे वो लोग। वेस्ट बंगाल बनाना चाहते हैं। देश को जिस प्रकार से वेस्ट बंगाल में भी टीएमसी की गवर्नमेंट ने किया था, दोनों में अंतर है। हमने ढोंग नहीं किया, कोई पाखंड नहीं किया। अरे को चुनाव लड़ने का अधिकार उसका
21:32 अधिकार है भी उसको मिलना चाहिए। वो चुनाव लड़े जीतने की सामर्थ होगी, जीतेगा, हम में समर्थ होगी हम जीतेंगे, हम में सामर्थ नहीं है तो नहीं जीतेंगे और नहीं जीतना चाहिए हमें। अगर हमें सामर्थ नहीं है तो। लेकिन अगर कोई व्यक्ति विरोधी ही क्यों न हो, अगर उसमें सामर्थ है, योग्यता है, उसको जीतना चाहिए। उसका लोकतांत्रिक अधिकार है। कैसे हम उससे उससे वंचित कर सकते हैं? लेकिन कुछ
22:02 लोग सत्ता में आ कर के जबरन पूरी व्यवस्था को कैद कर देना चाहते हैं। और जो वेस्ट बंगाल में देखने को मिला, सबको कैसे, वहाँ विरोधी दलों के कार्यकर्ता ओ को मारा गया। ये चीजें आँखों को खोलने वाली है। इस पर तो कोई बोलता नहीं। इस पर कोई टिप्पणी नहीं करता है। सब मौन है। 1990 में कश्मीर में जो कुछ हुआ, वो सब पे, सब लोग मौन थे। आखिर ये
22:32 दोहरा दृष्टि कोण क्यो और इसलिए पब्लिक विश्वास नहीं करते।
22:36 लोगों में योगी जी के डर से नहीं मरा।
22:40 कौन डर है?
22:41 नहीं, आपने 1 बार कहा था न कि 1 हाथ में माला है, 1 हाथ में भाला है।
22:45 बुरा क्या हो?
22:46 तो आपका जो आक्रामक तरीका है, ट डील विद माफिया क्या इसकी वजह से यहाँ पर है ही नहीं।
22:53 देखिये, हम लोग तो सज्जनों के लिए जितने संवेदनशील हैं, दुर्जनों के लिए, उतनी कठोर भी है। और ये शासन की रणनीति है। सस्त्र, रस्ते, रस्ते, राष्ट्रीय, शास्त्र, चिंता, प्रवर्तते, यानि व्यवस्था सबकी सुरक्षा के लिए
23:24 आवश्यक है। सुरक्षा सबको कानून का राज होगा। लेकिन कानून को बंधक बनाने की छूट किसी को नहीं दी जाएगी। कोई भी हो कतई नहीं देंगे।
23:38 आपने यह भी कहा था कि कानून जो है वो मानव के लिए होना चाहिए, दानव के लिए नहीं।
23:43 बात है।
23:44 पर 1 कांस्टिट्यूशनल डेमोक्रेसी में सर हर जीव जंतु के लिए कानून 1 जैसा होना चाहिए। मतलब शेर भी शिकार कर सकता है। गाय के लिए भी उतना ही हक है।
23:53 या क्या आप शेर को रोकते हैं? क्या?
23:55 नहीं।
23:56 तो आप शेर को बोलिये न जंगल में जाके नहीं रोक सकते। वो आप बोलिए न के शेर महाराज शिकार मत करिए। आपको हम रोटी खिलाएंगे जाइए। रोटी खिलाए।
24:07 तो वो मैं कह रहा हूँ कि
24:08 कानून में मैं वही कह रहा हूँ। वह 1 वहाँ की नैचुरल व्यवस्था है और वह नैचुरल व्यवस्था, दंड का प्रावधान। यह 1 व्यवस्था का प्रावधान है। और वह व्यवस्था व प्रावधान कानून ही लागू होती है। गैर कानूनी तरीके से नहीं लागू होती।
24:29 तो चीफ मिनिस्टर कैसे तय कर सकते हैं?
24:31 कौन मानव चीफिरचीफनिस्टर कहा तय करते हैं? चीफमिनिस्टरतोएक बात बोलते हैं कि देखो शांति बनी रहनी चाहिए। हम तो हमेशा शांति का उपदेश देते हैं।
24:40 कुछ लोग तो नहीं मानते कि आप शांति, सिर्फ, शांति, मतलब, आप बुल्डोजर, बाबा, ये सब आपके साथ आपके नाम के साथ जुड़ा हुआ है। और आपका जो 1 सिस्टम बना है, बाकी चीफ मिनिस्टर्स भी उसको कॉपी करने या मुझे 1 जब आप बुल्डोजर बाबा है तो वहां बुल्डोजर मामा भी आ गए है।
24:56 मुझे 1 बात बताइए ने बड़े प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर का डेवलपमेंट होना चाहिए की नहीं होना चाहिए जी और क्या। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए आज भी हम कुदाल और फावड़ा लेकर जायेंगे की हमें उसके लिए बुल्डोजर आधुनिक मशीनें चाहिए।
25:10 बुल्डोजर बाबा उसके लिए नहीं कहा जाता। आपको सर आप भी जानते हैं।
25:14 अब इन्फ्रास्ट्रक्चर के मार्ग में कोई बाधक होगा। यहाँ पहले होता क्या था, कोई कार्य होता था, अभी पैसा नहीं माफिया। जबरदस्त हड़प कर के सामान गिरा देते थे। अब लैंड का अलाटमेंट हो रखा है कि यह हाइवे यहाँ से अयोध्या के लिए बनना है, बराबंकी होते हुए बनाए बनना है। तो सत्ता प्रायोजित माफिया का करते कहते है नहीं, नहीं, अब ये यहां से नहीं बनेगा,
25:44 हमारी सुविधा इधर से है। हम इसको यहाँ से बना कर के वो अपना। वहाँ पे, मिट्टी और गिट्टी सब गिराना प्रारंभ करते थे। आधा द्वरा काम छोड़ के पैसा निकाल लेते थे। यह सत्ता में बैठे हुए लोगों की हिम्मत नहीं थी कि उन माफियाजको रोक सके। आप मुझे बताइए इस माफिया के लिए बुल्डोजर चला कर के उसको ध्वस्त करके जो सरकार ने तय कर रखा है, इस पे ही हाइवे बनेगा और उसी पे नियम के अनुसार
26:12 कार्य होगा। यह तय करना सरकार का काम है या नहीं है ये सरकार का कार्य और सरकार यही कर रही है।
26:18 पर जैसे आपके प्रदेश में 19 प्रतिशत मुसलमान पॉपुलेशन है और कई लोग कहते हैं उस उस समुदाय के लोग कहते हैं कि आप वो बुल्डोजर को, उनके घरों को तोड़ने में इस्तेमाल करते हैं।
26:34 किसी कोई निर्दोष मुस्लिम आके बता दे, मैं निर्दोष था, मेरे साथ अन्याय हुआ है, कोई बता दे, कोई नहीं बोल सकता। और फिर न्यायपालिका तो सबके लिए खुली
26:49 है, न ट्रिपल एस, तो ट्रिपल टाइम।
26:52 सरकार, ट्रिपल एस तो सी का उदाहरण है।
26:55 तो फिर तीसरी बार के लिए भी
26:56 आप कोशिश करेंगे, मैं कोशिश नहीं करूंगा, हमारी पार्टी कोशिश करेगे।
27:01 पर चीफ मिनिस्टर तो आप ही बनेंगे न।
27:03 नहीं, मैं क्यों बन सकता हूँ। भारतीय जनता पार्टी का कोई भी कार्यकर्ता बन सकता है अच्छा।
27:08 क्योंकि ऐसी अटकलें लगाई जा रही थी क्योंकि आपने कहा था कि जब आप पहली टीम में आपको, कुछ अफसर ने कहा था कि आप अयोध्या मत जाइए, विवाद हो सकता है। और आपने कहा कि अगर सत्ता चली भी जाए तो कोई बात नहीं। अब आपने ये 23 बार ही कहा की सत्ता चली जाएगी, त्याग देंगे। जब ऐसी बातें होती है तो फिर गले लगाई जाती है कि शायद योगी जी दिल्ली की तरफ देख रहे हैं या
27:34 फिर दिल्ली से न्योता आया है।
27:36 देखिये ये उदाहरण उन प्रसंगों को लेकर के होते हैं जहाँ पे विरासत को आगे बढ़ाने का 1 जज्बा सामने आता है। हम 2017 के पहले अयोध्या की क्या स्थिति थी। हर 1 व्यक्ति जानता था 12 जहद के साथ। जब हम लोग उस समय अयोध्या की यात्रा करते थे तो बहुत सारे बैरियर हुआ करते
28:07 थे। बुनियादी सुविधाओं का अभाव था और अयोध्या अपनी पहचान के लिए मोहताज थी। 2017 में भारतीय जनता पार्टी के डबल इंजन की सरकार उत्तर प्रदेश में बनी और उत्तर प्रदेश में सरकार बनने के बाद उन चुनौतियों से भी हमें का भी सामना करना था जो आजादी के बाद से लगातार जिन भावनाओं को दबाया गया था। वहाँ पर
28:40 साथ साथ अयोध्या का समग्र विकास भी करना था। लेकिन अयोध्या को उसकी पहचान भी देनी थी। और उसी में 1 बड़ा तपका ऐसा था जो यह मानता था कि हमें इस प्रकार के मुद्दों को नहीं टच करना चाहिए क्योंकि यह विवाद हो सकता है। देखिये आप सत्ता में रहेंगे तो आपके लिए अनुकूल वातावरण भी होगा, प्रतिकूल भी होगा।
29:10 अनुकूल और प्रतिकूल के बीच में समन्वय बना कर के। जब हम आगे बढ़ते हैं तो हे कुछ परिणाम दे पाएंगे और अयोध्या के साथ भी यही हुआ। हमने कहा भी ठीक है, विरोध होता है। तो होने दीजिए, देखेंगे अयोध्या जाएंगे कोई 1 कार्यक्रम किस का शुभारम्भ करेंगे जो अयोध्या की पहचान बन सके। दीपावली तो अयोध्या से जुड़ी भी थी। दीपा और दीपावली के
29:40 आयोजन को एकदम विस्मृत सा कर दिया गया था। अयोध्या में तो हमने दीपोत्सव के आयोजन के साथ फिर उसकी पहचान को वहाँ दिलाए तो हम लोगों ने वहाँ पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के प्रति और सर्युमय्या के प्रति दीपोत्सव के माध्यम से जो कर्तज्ञता ज्ञापित की थी, उसका परिणाम आज नई अयोध्या के रूप में सबके सामने है। जिसको देख कर के हर व्यक्ति अविभूत होता है। तो प्रधानमंत्री जी का जो विजन
30:11 विरासत की प्रति है, उसका मूर्तमान स्वरूप आज अयोध्या में भी देखने को मिलता है। आज आप देख रहे होंगे जिस अयोध्या में साल भर में कुछ लाख लोग आते थे, आज करोड़ो लोग वहाँ पहुँच रहे हैं, व्यवसाय वहाँ फल फुल रहा है। लोगों को अनेक अवसर प्राप्त हो रहे हैं। तो हम लोग अपनी सत्ता की चिंता करे और अपनी विरासत को विस्मित कर ले। तो मुझे लगता है कि ये हम न्याय
30:41 नहीं कर पा रहे हैं। अपने साथ भी, अपने समाज के साथ भी और अपने देश के साथ भी।
30:46 योगी जी अपने डबल इंजन सरकार का जिक्र किया। अखिलेश जी कहते हैं डबल इंजन क्या, अब तो इंजन 1 दूसरे को नमस्ते तक नहीं करते है।
30:54 देखिये यह उनके संस्कार थे। हमारे यहाँ हम विरासत को सम्मान दे कर के अपनी वर्तमान लीडरशिप को भी सम्मान करते हैं और अपने पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव रखते हैं। लेकिन जिनके आदर्श औरंगजेब हों तो उनका आचरण भी उसी प्रकार का जरूर होगा। और लोगों ने देखा भी अपनी आँखों से।
31:20 आप क्यों कहते हैं कि उनका औरंगजेब
31:22 उनके लिए आदर्श हैं, क्योंकि वो औरंगजेब को महमामंडित कर रहे हैं। वे सब लोग उस कैटेगरी में खड़े हो चुके हैं उनके नेताओं ने, मुंबई से लेकर के लखनऊ तक, ये सभी लोग तो महिमा मंडन करने वाले लोग हैं। तो जिनका जैसा आदर्श होगा तो वैसे ही उनका स्वयं का चरित्र भी होगा। यही तो हमारा, हमारी संस्कृति भी कहती है। भुता स्युं
31:53 जो जिसकी पूजा करेगा उस जैसा ही बनता है। हम राम को आदर्श मानते हैं, कृष्ण को आदर्श मानते हैं, शिव को आदर्श मानते हैं, उनकी पूजा करते हैं तो स्वाभाविक रूप से उनके अच्छे गुण भी। हमारे अन्दर उनकी कृपा से समायत होते है। जो औरंगजेब को, बाबर को अपना आदर्श मानता होगा। तो उन जैसे गुण भी उनके अन्दर देखने को मिलेंगे। और ये आचरण लोगों ने अपनी आंखों से देखा भी है और आगे भी देखेंगे।
32:23 वो कहते हैं आपको हिस्ट्री के बारे में कुछ पता नहीं है। राणा संगा के बारे में उन्होंने कहा कि वो थे जिन्होंने बाबर को न्योता दिया था। आप जानते नहीं हैं हिस् अरीनी विरासत के बारे में।
32:36 री हिस्ट्री, ये लोग जानते हैं, हिस्ट्री, यही लोग जानते हैं जो जिन्ना को महमामंडित करते हैं। हमें याद है इसी उत्तर प्रदेश में हम लोग लोह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के यूनिटी रन ऑफर यूनिटी के कार्यक्रम के साथ जुड़ रहे थे। हमने पूरे प्रदेश वासियों को इसके लिए आमंत्रित किया था।
33:07 सरकार भी थी, भारतीय जनता पार्टी भी थी, सभी दलों को हमने आमंत्रित किया था। 1 तरफ सरदार वल्लभ भाई पटेल जो भारत की एकता के आदर्श है। भारत की एकात्मता के शिल्पी हैं, हम उनके प्रति श्रद्धा का भाव व्यक्त कर रहे थे और ये लोग जिन्ना को महिमामंडन कर रहे थे। तो ये वही कैटेगरी है? ये वही ब्रीड है जो बाबर से लेकर के
33:37 औरंग जेत तक और जिन्ना तक को महमामंडन करते हैं। तो देश के प्रति इनके भाव क्या होंगे, भारत की विरासत के प्रति इनके भाव क्या होंगे, भारत के महापुरुषों के प्रति क्या इनके भाव क्या होंगे, ये अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है। और ये लोग अवसरवादी भी हैं। इनको पलटी मारने में कोई देर नहीं लगेगी। आज कर रहे हैं तो कहीं वोट लेना होगा। तो उनके कुछ नेताओं ने बयान शुरू देने शुरू किए हैं, कि
34:07 अब जो लॉस हो रहा है और जो कटघरे में खड़े हुए हैं तो उसके बारे में उन्होंने कहना शुरू कर दिया। नहीं साहब, ये तो है, उन्होंने गलत बोला है। और ये तो राष्ट्रीय महापुरुष थे, राष्ट्रनायक थे। राणा सांगा के इतिहास को अगर उन्होंने पढ़ा होता वो महान योद्धा जिसके शरीर के घाव इस बात को बताते थे की उन्होंने भारत की धर्म और संस्कृति को बचाने के लिए उस समय किस प्रकार के पराक्रम का परिचय दिया
34:37 था। ये माणा प्रताप महणासांगाछत्रपति, शिवाजी महाराज और गुरु गोविंद सिंह के बारे में, ये लोग बताएंगे, इतिहास के बारे में लोग क्या जानते है जो औरंगजेब और बाबर की पूजा करते है, जो जिन्ना को अपना आदर्श मानते है। लोगो से इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती है।
34:56 विधानसभा में आप का 1 भाषण भी था। आपने कहा था कि अगर ओरंगजेब का महिमा मंडल कर रहे हैं। वो जो नागपुर में जो कर रहे हैं, उनको यूपी आना चाहिए, हम उनका इलाज कर देंगे। इलाज कैसे करेंगे?
35:08 आप देखिये, किसी भी बीमारी का उपचार अलग अलग केंद्र होते हैं। तो यूपी ऐसे लोगों को बहुत अच्छा उपचार देता है। उनकी जैसी डिमांड होगी, उस प्रकार का उपचार दे देंगे।
35:24 महाराज आपके राज्य में क्या मुसलमान सुरक्षित हैं? क्योंकि आए दिन सनातन की बात होती है। आप, आप योगी हैं, मुख्यमंत्री हैं, महाराज हैं, क्या हैं आप?
35:35 फिर मैं 1 सामान्य नागरिक हूँ, उत्तर प्रदेश का 1 नागरिक हूँ और 1 नागरिक में 1 योगी हूँ, जो सबके सुख और सबके निरोगता की कामना करता है, सबका साथ और सबके विकास के मंत्र पर विश्वास करता है और उसी भाव के साथ हम लोग कार्य भी करते हैं। आप मुझे बताइए। दुनिया की सबसे प्राचीनतम धर्म
36:05 और संस्कृति है सनातन धर्म। उसके नाम से ही आप अंदाजा लगा सकते हैं। दुनिया की कोई जाति, मत और मजहब नहीं है, जिसको उसकी विपत्ति के समय सनातन धर्मावलम्बियों ने शरण न दी हो, उसके संरक्षण के लिए, उसको हर प्रकार से फलने फूलने के लिए अवसर न प्रदान
36:35 किया हो। लेकिन बदले में उसे मिला क्या? बदले में मिला क्या? और दुनिया के अन्दर कोई उदाहरण नहीं। कोई उदाहरण नहीं कि कहीं भी हिंदू राजाओं ने दुनिया के अन्दर, कहीं भी अपने बल पर, अपने वैभव के दम से किसी पर आधिपत्य स्थापित किया हो,
37:05 कहीं नहीं है। देखिये, उदाहरण। अयं निज परोवेति गणना लगु, चित, साम उदार चरितानां तो सुदेव कुटुंब कम। इस सनातन वाक्य है। दुनिया के अन्दर कोई बोलता है, दुनिया के अन्दर किसी ने स्काच किया, कोई नहीं किया। सब तो हड़पना चाहते हैं। यानि यह अपना है या पराया है। यह भेदभाव छोटी संकुचित बुद्धि के लोग करते हैं। उदार चरित्र के लोगों के लिए तो पूरी दुनिया ही 1
37:36 परिवार है। इस भाव के साथ सनातन धर्मावलंबी ने हमेशा काम किया है। और आज भी उदाहरण देखने को मिल सकता है कि सौ हिंदु परिवारों के बीच में, सौ हिंदू परिवारों के बीच में 1 मुस्लिम परिवार सबसे सुरक्षित रहता है। उसको उसके पर्व त्योहारों को उसको अपने सभी मजहबी कर्मों को करने के लिए
38:06 या जिस मत और मजहब या सम्प्रदाय या सख्त का न्याय होगा, उसको उस परंपरा के अनुसार अपने सारे, धार्मिक मान्यता या उपासना विधि को पूरी स्वतंत्रता होती है। लेकिन मैं कहता हूँ, सौ परिवारों के बीच में 1 हिंदू की बात तो दूर करिए। सौ मुस्लिम परिवारों के बीच में 50 हिंदु सुरक्षित रह सकता है, क्या नहीं रह सकता। आप बांग्लादेश आपके सामने उदाहरण है, इससे पहले पाकिस्तान उदाहरण था, अफगानिस्तान में क्या हुआ था, ये
38:37 चीजें दिखती हैं। और होशियारी यही है कि कहीं धुआं उड़ रहा हो या किसी को ठोकर लग रही हो तो हमें ठोकर लगे। इससे पहले हम संभल जाए तो वही संभालने के लिए बोला जाता है। हम तो सबके बीच सबको समान भाव से देख रहे हैं। उत्तर प्रदेश में मुसलमान सबसे ज्यादा सुरक्षित है, सबसे ज्यादा सुरक्षित है। अगर हिंदू सुरक्षित है तो वह भी सुरक्षित है। अगर दंगे यहाँ यूपी में होते थे, जो 2017 के पहले
39:08 अगर हिंदू की दुकान जलती थी तो मुसलमान के भी जलती थी, हिंदू का घर जलता था तो मुसलमान के भी जलती थी। और 17 के बाद से दंगे बंद हुए। अगर हिन्दु सुरक्षित है तो मुसलमान भी सुरक्षित है। और दूसरा जो मैंने कहा, इतिहास में कोई उदाहरण नहीं बता सकता कि अपने बल से, अपने वैभव से, किसी हिंदू राजा ने किसी देश पर जबरन कब्जा किया हो, कभी नहीं। इतिहास इसका उदाहरण है। आप उठा के
39:38 देख सकते हैं। भगवान राम लंका में गए और लंका में रावण पर विजय प्राप्त करके लक्ष्मण को वहाँ के वैभव को देखकर थोड़ा। मोहित हुए। भगवान राम ने कहा नहीं लक्ष्मण, उन्होंने उनको 1 ही बात कही। और मुझे लगता है कि आज की पीढ़ी के लिए बहुत प्रणाद है। न्होंने। उस समय कही थी लक्ष्मण जी को जो प्रेरणा, जो निर्देश
40:08 भगवान राम रहे हैं। लंका के बारे में अप स्वर्णमय लंका, न, मे लक्ष्मण रोचते, जननी जन्म भूमि, स्वर्गादपि, गरीयसी लक्ष्मण, लंका भले ही सोने की क्यों न हो, लेकिन याद रखना यह मुझे रुचि कर नहीं लगता। मेरी रूचि का नहीं है। मेरा काम था माता सीता को
40:38 दुरात्मा रावण से मुक्त करना, वो मैंने कर लिया है। अब हमें यहाँ से निकलना है। क्योंकि जिस माँ ने जन्म दिया है और जहाँ हमने जन्म लिया है, उससे बढ़ कर के दुस्सा कोई भी स्वर्ग से बढ़ कर के भोग गुस्सा हो ही नहीं सकता, इससे बढ़ कर के भोग हो ही नहीं सकता है, चाहे वो स्वर्ग ही क्यों न हो। और इसलिए हम यहाँ नही करेंगे। ये उदाहरण मैं इसलिए दे रहा हूँ जिसमे जो सनातन
41:05 धर्म पर प्रहार करते है, उनकी आँखें खुले और देखे, ये उद्धरण हमारे सामने पर्याप्त है। और ऐसे अनेक उदाहरण आपको समय समय पर मिलेंगे।
41:14 मैं इससे थोड़ा सा हट के फिर से उत्तर प्रदेश के 1 और मेले के बारे में पूछना चाहती हूँ जो गाजी सालार मसूद के नाम से जो मेले लगते हैं। संबल और भरच में अब बात चल रही है कि शायद उसको भी बंद किया जा सकता है। और आपने भी कहा था कि गाजी सालार मसूद उनके, उनके जैसे जो हमलावर हस्तियां हैं, उन्हें 1 आइडल, उन्हें 1
41:44 उस रूप से नहीं देखना चाहिए और नए भारत में उनके लिए जगह नहीं है।
41:47 देखिये, आक्रांताओं को महमामंडित नहीं करना चाहिए। ये भी हमें मालूम होना चाहिए कि आक्रांता विदेशी थे, इन्होंने भारत की आस्था पर प्रहार किया, भारत की बहन बेटियों की जत के साथ खिलवाड़ किया, भारत को लूटा,
42:19 इसका महिमामंडन आस्था का अपमान है। इनका महिमा मंडन मातृ शक्ति का अपमान है। इनका महिमा मंडन करके हम देश का अपमान करते हैं। और मुझे लगता है कि यह कोई भी भारतीय स्वीकार नहीं करेगा। याद करना, यही वे आक्रांता थे जिन्होंने देश के अन्दर जबरन धर्मांतरण को आगे बढ़ाया था। देश के अन्दर
42:49 आज भी बहुत सारे मुस्लिम परिवार ऐसे हैं जो अपने पूर्वजों की परंपरा का स्मरण करते हैं। और 6 पीडी पहले 8 पीडी पहले। बहुत सारे लोगों ने डॉक्यूमेंट तैयार रखे हुए हैं कि उनके पूर्वज कोई न कोई हिंदू था। तो मुझे लगता है उस समय किन्ही कारणों से उनको अगर इस्लाम स्वीकार करना पड़ा है। तो उन आक्रांताओं के क्रूरता से कोई जजिया कर नहीं दे पाया। कोई
43:20 जो है अपने स्वयं के परिवार को बचाने के नाम पर, कोई अन्य उसके नाम पर। मुझे लगता है की हम लोगो को इसको स्वीकार नहीं करना चाहिए की आक्रांता का कहीं महिमा मंडन हो, ्तरेिदेशट्ेडिशन का मतलब क्या होता है।
43:37 ट्रेडिशन के लिए तय करते थे गाजी
43:40 गाजी को तो कहीं गाजी। तो यहाँ उत्तर प्रदेश में कोई युद्ध जीता नहीं था। देखिये सालार मसूद गाजी वही है जिसने मोहम्मद गजनवी के साथ भगवान सोमनाथ के मंदिर को लूटने और तोड़ने का काम किया था। यह विदेशी लुटेरा था और इसको महाराज सुहेल देव के नेतृत्व में हिंदू राजाओं ने
44:10 जिस कार्य के लिए हकदार था, जिंदा खड़ा करके इसको पूरी तरह जलाया था। इस्लाम में सबसे क्रूर मौत मानी जाती है, जिसका वो हकदार था, उसने जितना अत्याचार किया था, हिंदु धर्म और संस्कृति को तोड़ कर के आस्था पर प्रहार करके, बहन बेटियों के जज के साथ खिलवाड़ करके, वही व्यवहार उसके साथ उस समय हिंदु राजाओं ने किया था। तो जय जयकार तो महाराज सुहेल देव की होनी चाहिए और पूजा महाराज सुहेल देव की होनी चाहिए
44:39 न कि सालार मसूद गाजी की।
44:42 इसीलिए कहते हैं कि मुसलमान खतरे में है, जो उवैसी कहते है आपके राज्य में। क्योंकि जो ट्रेडिशन चलते आये हैं, आप उनको हटाना चाहते हैं। जो उनके जिनके लिए वो पूजनीय समझते हैं। आप उनको कह रहे हैं कि वो गद्दार हैं। देखिये न को हना चाहते हैं।
44:59 इसलिए मुसलमान इससे खतरे में नहीं है। इनके वोट बैंक की राजनीति खतरे में है। जिस दिन अपने पूर्वजों को भारतीय मुसलमान समझ जाएगा, इन सबके बुरे बिस्तर बन जाएंगे। इसलिए अपने प बोरिया, विस्तर को दुरुस्त रखने के लिए लोग इस प्रकार की भड़काऊ बातें को कहते हैं। भारत के मुसलमानों को याद रखना होगा। वे तभी सुरक्षित है जब हिंदू सुरक्षित है, हिंदू ट्रेडिशन सुरक्षित है, उसी के साथ उनकी भी सुरक्षा निहित है।
45:28 तो हिंदू कहा खतरे में है?
45:30 है तो हिंदू कश्मीर के अन्दर क्या हुआ था? अभी बांग्लादेश के अन्दर क्या हुआ है, पाकिस्तान के अन्दर क्या हुआ है?
45:39 यहाँ पर जायेंगे आप बांग्लादेश जायेंगे, आप पाकिस्तान जायेंगे कहाँ जायेंगे?
45:44 1947 के पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश दोनो भारत के हिस्से थे। जी ये इतिहास है। इस सच्चाई को आप भी जानती है, मैं भी जानता हूँ, पूरा भारतीय जानता है। हम उस सच्चाई को कैसे भूल सकते हैं? या क्या पाकिस्तान में हमारी हिंगलाज माता का मंदिर नहीं है? क्या? क्या इसको भूल जायेंगे? क्या बांग्लादेश में माता ढाकेश्वरी का मंदिर नहीं है? क्या तमाम ऐसे धर्म स्थल है? आज वहाँ पड़े हुए है। 2
46:14 के साथ किस प्रकार का व्यवहार हो?
46:15 इसीलिए तो सी कानून लाई बीजेपी की सरकार जो हिंदु यहाँ आना चाहते, हिंदुओं
46:20 के आने न आने देने की बात नहीं कर रहे हैं। जो आ चुके, जो आ चुके हैं। आखिर इन लोगों ने जो यहाँ पर इस्लाम खतरे में बात कर रहे हैं, उन हिंदुओं का भी उन्होंने यहाँ विरोध किया था। आप अनुमान करिए की भारत में ही वो हिंदुओं का विरोध कर रहे हैं, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश के अन्दर क्या हाल हो रहे होंगे? क्या? क्या उनके हालात क्या होंगे? इनकी मानसिकता का अंदाजा इसी से लगाया जा
46:47 सकता है कि हिंदुओं के प्रति इनके दुराग्रह कितने खतरनाक हैं और कितने छोटे स्तर के हैं।
46:54 महाराष्ट्र में ही कुछ महीने पहले 1 स्लोगन उठा था, बंटेंगे। तो कटेंगे वो भी ऐसे ही विभाजनकारी स्वोभाजनकारी नहीं था?
47:05 आप मुझे बताइए यह देश गुलाम क्यों हुआ? क्योंकि जातियों में विभाजित था। अगर उनको जोड़ने की बात की जा रही है। कि वे बंटों मत अच्छे के बारे में सोचो, विकास के बारे में, सोचो, विरासत के बारे में सोचो। चला नहीं था। ये यू पी सी मे बाटेंगे तो कटेंगे? 1 रहेंगे तो सेफ रहें, सेफ
47:35 रहेंगे। तो ये बात यहाँ से कही थी। चीजें आगे बढ़ी, लेकिन इसमें बुरा आगे
47:43 बढ़िए, इलेक्शन जीत गए।
47:45 आप इलेक्शन जीते के बहुत सारे कारण होते है। 1 नारा इलेक्शन का काटने की बात
47:51 होती है तो कैसे जुड़ने की।
47:54 जब कटने काटने मुझे इतिहास में करोड़ो क्या तो फिर नहीं गए, क्या काटे नहीं गए थे। इस उसको भूल क्या इतिहास वर्तमान का दर्पण होता है और भविष्य की कार्य योजना बनाने का 1 माध्यम भी होता है।
48:13 इसको कुरेद कुरेद को के कुरेद के।
48:15 इसलिए वर्तमान पीढ़ी भूल गयी होगी तो उसको बताने का 1 माध्यम है। अरे बताना पड़ेगा हमें। यह हमारा दायित्व भी है।
48:26 पर ये कुरेदने से क्या दंगे दंगे
48:28 नहीं होंगे, दंगे कैसे होंगे? दंगाइयों का उपचार भी तो है। दंगों से वो डरेगा जो उन दंगाइयों के सामने घुटने टेक कर के नाक रगड़ते हैं, उनको घुटनों के बल चलने के लिए हम मजबूर कर लेते हैं और ठीक भी करते हैं। उनको।
48:49 ये जो आपका, जो दबंग स्टाइल है,
48:51 दबंग स्टाइल नहीं, ये हमारी शराफत का स्टाइल है।
48:55 हां, आप ये कहते हैं। लेकिन अखिलेश जी और जो उत्तर प्रदेश के बाकी नेता हैं, वो यही कहते हैं कि आप जो कह रहे हैं कि प्रशासन और लॉयंडऑर्डरजो कंट्रोल में हैं, ये सिर्फ लीपापोती की जाती है, वो उनके सोशल मीडिया हैंडल। पर रोज तो मुझे का लिस्ट आता है।
49:16 मैं क्या कर रहा हूँ। आप मुझे बताए छयासठ करोड़ लोग। प्रयाग राज में आये। आपकी एन आई की तो पूरी टीम वहाँ कवरेज कर रहे थे। कई कैमरे आपके लगे हुए थे। आपने किसी श्रद्धालु को ये कहते हुए सुना कि सब मेरे साथ लूट हुई है। किसी बहन और बेटी को ये कहते हुए सुना कि उसके साथ छेड़खानी हुई है कहीं? पर किसी को यह कहते हुए, किसी व्यापारी को कहते हुए सुना गया कि उससे जबरन
49:41 किसी ने पैसा मांगा है, किसी व्यक्ति को अपहरण की कोई शिकायत वहाँ आई। क्या? इन 45 दिनों में आप मुझे? बताइए इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? भाई हमारी कितनी फोर्स रही होगी। वहाँ पे। तो फोर्स तो 1 सीमित संख्या में थी न। 50 हजार के आस पास हमारी फोर्स वहाँ पे थे। और प्रति दिन प्रति दिन 28, 29 और 30, इन 3 दिनों में पंद्रह करोड़ श्रद्धालु आए थे।
50:11 29 के पहले यानि 28 के पहले प्रतिदिन 1 करोड़ से कम श्रद्धालु थे, 50 हजार से लेकर 60 हजार, 50 लाख से लेकर 60 लाख तक आते थे। और 29 के बाद से फिर यह बढ़ता गया। और 3 फरवरी के बाद से यानि बसंत पंचमी के बाद से यह और तेजी के साथ आगे बढ़ा। संख्या डेढ़ करोड़ 2 करोड़ डेढ़ करोड़ 2 करोड़ की परदे की आ रही थी। लेकिन कहीं आप लोगो ने सुना? कोई बात
50:39 नहीं थी। 225 करोड़ की आबादी का राज्य अगर आपसी पहले से गुटबाजी नहीं है, पहले से वैमनस्यता नहीं है, और कोई आपसी वो नहीं है, तो सामान्य रूप से कोई इस प्रकार की घटना को अंजाम नहीं दे सकता है। यह लीपापोती नहीं, यह वास्तविकता है। और यह उत्तर प्रदेश की बहन बेटियां इस बात को जो अभिव्यक्त करती है, हम लोग नहीं बोलते हैं। ये तो उत्तर प्रदेश
51:09 की माताएं बहने बोलती है, बेटियां बोलती है। हम आज सुरक्षित है। नहीं तो 17 के पहले तो यहाँ पे, स्कूली बालिकाएं, बहुत सारी ऐसी थी, ऐसे ऐसे कस्बे थे, ऐसे ऐसे जनपथ जहाँ पर अभिभावक अपने बच्चों को या तो दूर के रिश्तेदार के पास या किसी हॉस्पिटल में द दूर भेज देता था। आप मुझे बताइए जब उस बेटी को माँ बाप का संरक्षण मिलना है। बचपन में तब वो दूर हॉस्टल में जाकर के पढ़ने के लिए
51:37 मजबूर है। आज मुझे प्रसन्नता है कि डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी की सरकार के कारण वो बेटी अपने माँ बाप के संरक्षण में अपने घर से स्कूल जाती है और घर में वापस आती ह। आज वो अपने को सुरक्षित महसूस करती है। और मैं तो 1 बेटी से मिलने के लिए कैराना गया था। मैं जब उस परिवार में गया था 2000 पंद्रह में उस परिवार के अभिभावक की हत्या हुई थी, वो 1 व्यापारी परिवार था
52:07 और जब उस परिवार से मिलने के लिए गया था, वह परिवार यहाँ से भाग करके सूरत चला गया था। 18 में वापस आया तो वापस आने पर फिर से उन्होंने व्यापार शुरू कर रहे थे तो मैं वहाँ गया था फिर मिलने के लिए पूछने के लिए की भाई आप क्यों भागे थे और फिर वापस आये हैं। तो उस परिवार ने मुझे बताया हमारे जो परिवार का मुखिया जो मुखिया थे उ उनकी तो हत्या कर दी गयी।
52:36 पंद्रह मई 2015 में तब दंगों में अखिलेश यादव समय दंगों के पहले अखिलेश यादव समय चीफ निस्टर थे। यहाँ पर यह दंगों की बात की बात है और पहले फिरोती वसूली गयी, फिर उसके बाद उनकी हत्या की गई थी। इसके बाद परिवार को जब कोई पुलिस संरक्षण नहीं मिला है क्योंकि वहां के ज्यादातर हिंदू परिवार पलायन कर गए थे, करना छोड़ कर
53:06 के भाग चुके थे लेकिन सरकार जब आई, सरकार ने जब ऐसे अपराधिक तत्वों के खिलाफ सख्ती शुरू की, हमारी सरकार आने के बाद तो बहुत सारे परिवार वापस आना शुरू हुए तो उनकी प्रॉपर्टी पर बहुत सरे दंगाइयों ने कब्जा करके रखा हुआ था तो उन कब्जों को खाली। बहुत सारे लोगो ने तो सरकार बनते ही कब्जे खाली कर दिए थे। बाकी जो बचे हुए थे तो उनको हमने वसूली के साथ कब्जे खाली भी करवाए। और ये
53:35 सारी कार्यवाई वहाँ पर हुई तो उस परिवार से मिलने गया था। परिवार के 1 प्रमुख सदस्य की हत्या हुई थी और उसे किराना का पलायन शुरू हो गया था। उस परिवार में छठी क्लास में पढने वाली 1 बालिका थी। मैं उस परिवार में गया तो मैंने बेटी से पूछा, मैंने कहा कौन क्लास में पढ़ते है, से क्लास में मैंने स्कूल जाने में ही लगता है। उसने कहा नहीं नहीं अब सोचिए कि 3 साल पहले
54:06 जो बेटी स्कूल जाने से वंचित रह गयी थी और सूरज जाने के लिए मजबूर हुई थी, वही परिवार वापस आया क्या उसको सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए थी। आप कह रहे हैं कि दंगाइयों के खिलाफ कारवाई नहीं होनी चाहिए तो फिर इन बेटियों की सुरक्षा कौन करेगा, इन व्यापारियों की सुरक्षा कौन करेगा? तो यही डंडा इन बेटियों की सुरक्षा करता है, इन व्यापारियों की सुरक्षा करता है, इन दंगाइयों को और इन अपराधी और माफियों को ठिकाने भी
54:34 लगता है। और इसलिए इतनी सख्ती हमें करनी पड़ती है। और तब 25 करोड़ की जनता भारतीय जनता पार्टी के साथ, समर्थन के साथ खड़ी है।
54:43 आपने इस परिवार का जिक्र किया। मैंने आपका 1 भाषण सुना था जिसमें आपने कहा था कि जो यूपी का युवा है, छिपता था। ये कहने से कि मैं यूपी का हूं, क्योंकि उसको 1 श्रमिक के रूप में देखा जाता था, एग्रीकल्चर लेबर या कंस्ट्रक्शन लेबर। लेकिन यू पी की जो छवि बदली है ही सेज एट प्राउडली कि मैं यूपी का हूं, उसके बारे में कुछ बताइए।
55:07 देखिये। 2017 के पहले की स्थिति ऐसी थी। उत्तर प्रदेश का नाम सुन करके ही उसको किसी नौकरी के लिए जाता था, उसको बाहर कर दिया जाता था। उत्तर प्रदेश का नाम सुन कर के ही होटलों में कमरे नहीं मिलते थे, रूम नहीं मिलते थे, धर्मशाला में जगह नहीं मिलती थी, लोग किराएदार नहीं बनने देते थे। लोगों को अपनी पहचान छुपानी पड़ती थी। आज मैं कह
55:38 सकता हूँ उत्तर प्रदेश का युवा हो, अनदाता किसान हो या किसी भी सेक्टर का कोई व्यक्ति आज पहचान के लिए मोताज नहीं है। और ये पहचान काले किले जो मोताज नहीं है, आज वो कहीं जाता है। तो कहीं भी देश के अन्दर कहीं जाता है, दुनिया के अन्दर कहीं जाता है। अगर वो यूपी का नाम लेगा तो लोगो के मन में अगर वह
56:08 धार्मिक, आस्थावान व्यक्ति है तो अयोध्या काशी प्रयागराज या यहाँ के धर्मस्थल याद करके बड़े सम्मान के साथ लोग उसको देखते है। यूपी के नाम से, यूपी के इन्फ्रास्ट्रक्चर से लोगों के मन में होता है। अच्छा ये वही से आए हैं तो यू पी, जो पहले 1 श्रम शक्ति माना जाता था, 1 लेबर के रूप में, यहाँ की 1 पहचान थी की यहाँ के लोग 1 सामान्य उसके साथ जुड़ेंगे। आज
56:39 वही यूपी विरासत की शक्ति के रूप में और अर्थशक्ति के रूप में देश के अन्दर और दुनिया के अन्दर
56:46 अपनी पहचान आप तो फिल्म जगत से भी लोगों को बुला रहे हैं।
56:48 यहाँ हमारी फिल्म सिटी, यहाँ पर यू पी के अन्दर 1 फिल्म सिटी का निर्माण का कार्य प्रारंभ हो रहा है। और उसमे सारी कारवाई आगे बढ़ चुकी है। और मुझे लगता है कि कला का सम्मान किया जाना चाहिए। और कला के उसी सम्मान को आगे बढ़ाने के लिए हम लोगों ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।
57:08 डीलिमिटेशन पर जो दक्षिण के राज्य हैं, वो थोड़े नर्वस कह लीजिए। वो कहते हैं कि पॉपुलेशन के आधार पर रेप्रेजेंटेशन नहीं होना चाहिए। वो कह रहे हैं कि उनकी जो उनकी जो पहचान है वो खतरे में है।
57:25 देखिये मान्य गृह मंत्री जी ने इस मामले में बहुत स्पष्टता के साथ कह दिया है। और ये केवल स्टालिन के नाम ने जो बैठक की है, केवल 1 राजनीतिक एजेंडा है उनका। मुझे लगता है कि मान्य गृह मंत्री जी के वक्तव्य के बाद इस पर कोई भी प्रश्न नहीं खड़ा होना चाहिए।
57:49 तमिलनाडु में ही हिंदी भाषा को लेकर काफी विरोध हो रहा है। आप हिंदी बेल्ट के 1 मुख्यमंत्री हैं, तो आप इस बारे में क्या सोचते हैं?
57:59 देखिये देश को भाषा के नाम पर, क्षेत्र के नाम पर नहीं बांटा जाना चाहिए। और हम आभारी हैं प्रधान मंत्री मोदी जी के जिन्होंने वाराणसी में लगातार। कासी तमिल संगम के इस बार तीसरे संस्करण को भी यहाँ पर आयोजित कराया। यानि 1 तरफ कासी है और उत्तर प्रदेश है, जिसमें कासी तमिल संगमम
58:29 का आयोजन हो रहा है। तमिल भारत की प्राचीनतम भाषाओं में से 1 है और इसका इतिहास उतना ही पुराना है जितना संस्कृत का इतिहास है। हर भारतीय के मन में तमिल के प्रति श्रद्धा, र, सम्मान का भाव है। क्योंकि भारत की विरासत के बहुत सारे तत्व आज भी उसमें मौजूद है। तो हिंदी से नफरत क्यों भाषा को तोड़ती नहीं है
58:59 और जोड़ने का काम करती है। और त्रि भाषा सूत्र के माध्यम से तो हिंदी को राजभाषा की मान्यता दे। कर के हिंदी, इंग्लिश और स्थानीय भाषा व तमिल हो सकती है, मलयालम हो सकती है, कर्नल हो सकती है, तेलगु हो सकती है, मराठी हो सकती है, बंगाली हो सकती है, असमी हो सकती है, उड़िया हो सकती है। किसी भी अन्य भाषा को आप लोकल स्तर पर लागू करिए, यह तो देश के अंदर
59:30 एकता का संदेश देने वाला है, उत्तर से दक्षिण तक, पूरब से पश्चिम तक, पूरे भारत को एकता के सूत्र में जोड़ने वाला है, माध्यम है। और मुझे लगता है कि भारत का राष्ट्रगान भी इसी बात का संदेश देता है। यह केवल 1 संकीर्ण राजनीति है। जब इन लोगों के वोट बैंक खिसकते हैं तो ये लोग इसी प्रकार की, क्षेत्रीयता की और भाषाई आधार पर बांटने की र्रभिसंदीकरते हैं। जनता जनार्दन को देश की एकता के लिए इस
59:59 प्रकार के किसी भी खडयंत्र से हमेशा सचित रहना चाहिए।
60:04 कर्नाटक में और तमिलनाडु में, खासकर इन दोनों राज्यों में कई लोगों का मानना है कि जब यूपी या बिहार के, जो हिंदी स्पीकिंग स्टेट्स के लोग जाते हैं और वहां पर बसते हैं, 10 पंद्रह साल भी रहते हैं, पर वहां की स्थानीय भाषा नहीं बोलते, हिंदी ही बोलते हैं। और ऑटो रिक्शा वालों के साथ या फिर किसी रेस्टरां में हिंदी में ही बात करते हैं, स्थानीय भाषा में नहीं करते। लेकिन उन राज्यों से जब लोग उत्तर
60:31 प्रदेश आते तो हिंदी बोल लेते हैं, हिंदी में ही बात करते हैं। क्योंकि कामकाज की जो भाषा है, वो हिंदी है।
60:38 तो क्या समस्या। मैं कहता हूँ कि हमें हर भाषा को सीखना चहिए। हम तो यहाँ उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तमिल भी पढ़ा रहे हैं, तेल को भी पढ़ा रहे हैं, कन्नड भी पढ़ा रहे हैं, मलयालम भी पढ़ा रहे हैं, और यही नहीं पढ़ा रहे है। हम लोग विदेशी भाषाओं को भी यहाँ पढ़ा रहे है। हाँ के विश्वविद्यालयों में, ये तो नेशनल एजुकेशन पॉलिसी में भी ये सारे प्रावधान किए गए है। अगर हम यहाँ तमिल पढ़ा
61:03 सकते हैं, तेलगु पढ़ा सकते हैं, मलयालम और कन्नड पढ़ा सकते हैं, मराठी पढ़ा सकते हैं। कल ही मैं बिठुर में गया था। नाना राव पेशवा के पावन, जयंती कार्यक्रम के साथ जुड़ने के लिए गया था। बिठूर महोत्सव के साथ। हमने भारत के 1857 के प्रथम स्वतंत्र समर केस महानायक के सम्मान के साथ, बिठूर महोत्सव को जोड़ा था।
61:34 नानाराव पेशवा के ही महल में, बचपन में महारानी लक्ष्मी बाई ने तिरंदाजी भी सीखी थी, युद्ध कला सीखी थी और वहीं से उन्होंने युद्ध के सारे गुण सीखने के बाद फिर 1857 में अंग्रेजों को परास्त किया था। अगर हम इन सभी भाषाओं को उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में पढ़ा सकते हैं, तो तमिलनाडु के विश्वविद्यालय में भी अगर हिंदी पढ़ा
62:04 दी जाए। क्या बुरा है। मुझे लगता है कि हमें थोड़ा विराट स्वरूप रखना चाहिए। देश के लिए कुछ चर तो देश के लिए निकालो
62:17 चंद्र। बाबू नायडू ने भी यही कहा कि जितनी जितनी भाषाएं सीखना चाहते हैं चाहिए अच्छी बात है। हम अभिनन्दन करते हैं जी मैंने 2024 के बाद चुनावों के बाद जिसने अधिक
62:30 भाषा सीखेंगे, उतने अधिक रोजगार के अवसर भी खुलेंगे ह।
62:35 जी हैदराबाद के लिए उन्होंने वही किया था अपने पिछले टर्हांअचचछी बात हैं और लिए हैदराबाद।
62:40 आज 1 हब बना है।
62:41 राहुल गांधी हर राज्य में जाकर यही कह रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सभी भारतीयों को। 1 जैकेट में, 1 विचार, 1 सोच, 1 एजुकेशन, 1 किस्म से टू गो फॉवर्ड इन लाइफ, 1 ही रूल है, 1 ही एग्जाम्पल है और भारत में यह नहीं चलेगा भारत में डायवर्सिटी क्या बात है क्या?
63:03 1 भारत और श्रेष्ठ भारत नहीं बनना
63:05 चाहिए तो अलग अलग तरीके होते हैं,
63:08 अलग अलग रास्ते होते कौन से रास्ते होते है। उनसे पूछना चाहिए क्या कर रहे थे 6 दशक तक पूछे न अपने नाना से, दादी से, अपने पिता श्री से भी क्यों नहीं पूछा उन्होंने क्यों नहीं उन्होंने उस समय किया है। जो काम पिछले साढ़े 10 वर्ष के अन्दर मोदी जी ने करके दिखाया है, जिसमें पूरे भारत की स्वीकरोक्ति है। पूरा भारत का व्यापक जन समर्थन मोदी जी को प्राप्त हो रहा है,
63:39 यह काम क्यों नहीं कांग्रेस ने कर लिया? अयोध्या के विवाद को तो हमेशा विवाद बने रहने देना चाहते थे। काशी की संकरी गलियों में गाँधी जी के नाम पर जिंदगी भर राजनीति कर रहे हैं। लेकिन 1916 में काशी की संकरी गलियों को लेकर के गाँधी जी ने टिप्पणी की थी काशी में और बहुत कड़ी टिप्पणी की थी। क्यों न न्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के सपने को साकार किया? मोदी जी ने ही साकार किय क्यों नहीं? 3
64:09 तलाक कुप्रथा को कांग्रेस ने समाप्त किया? क्यों नहीं कुंभ के आयोजन को इतनी भव्यता के साथ, दिव्यता के साथ कांग्रेस ने आगे बढ़ाया? क्यों नहीं देश के अन्दर, इन्फ्रास्ट्रक्चर के वर्ल्ड क्लास मॉडल को कांग्रेस देने में क्यों विफल रही है? 1 भारत, श्रेष्ठ भारत के ये सभी अवसर है। और अयोध्या में आज तो राम मंदिर का निर्माण भी हो गया। 1 नई अयोध्या के दर्शन सबको हो रहे हैं। जिस रूप में पूरा अयोध्या के प्रति लोग
64:37 लाल दिख रहे हैं, लाखों लोग प्रतिदिन आ रहे हैं दर्शन करने के लिए।
64:41 राहुल गाँधी तो भारत जोड़ो के लिए निकल पड़े थे, उन्होंने 2 यात्राएं की। तो फिर उनको क्यों आप कह रहे हैं कि वो विभाजनकारी काम करते?
64:50 देखिये, इनका भारत जोड़ो भारत तोड़ो अभियान का हिस्सा है। ये जहाँ जाते हैं, दक्षिण में जाएंगे तो उत्तर भारत की निंदा करेंगे उत्तर में आयेंगे तो दक्षिण की निंदा करेंगे, भारत से बाहर जायेंगे तो भारत की निंदा करेंगे इस लिए इनके आचरण को देश समझ चुका है लेकिन भारत की राजनीति में
65:21 भारतीय जनता पार्टी के लिए राहुल जैसे कुछ नमूने जरूर रहने चाहिए जिससे 1 रास्ता हमेशा के लिए साफ़ होता अच्छा रहता है बना रहे आखिर
65:32 में 1 सवाल आपने, वन ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी की बात कही उत्तर प्रदेश के लिए लेकिन पर कैपिटल इनकम अभी भी उस तर्क का नहीं है तो ये 2 जो अलग अलग चीजे हैं इनको आप कैसे आप एकजुट करेंगे खिये उत्तर
65:47 प्रदेश जैसे राज्य में यह 1 चुनौतीपूर्ण कार्य था और आदणीय प्रधानमंत्री जी ने विजन हम लोगों के सामने रखा था हम लोगों ने प्रधान मंत्री जी के प्रेरणा दायी नेतृत्व में इस पर कार्य करना प्रारंभ किया। आज हमारी सरकार के 8 वर्ष पूरे हो रहे हैं इसमें से 3 वर्ष के दौरान तो कोबिड महामारी
66:17 के साथ जूझते हुए, हमारे व्यतीत हुए लेकिन उस सबके बावजूद डबल इंजन की भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पिछले 8 वर्ष में अगर जो तथ्य हैं, जो आंकड़े हैं वो मैं आपके सामने रखता हूँ 1950 से 1950 से लेकर के 1947 से लेकर के 2017 तक इन 70 वर्षों में उत्तर प्रदेश की जो अर्थव्यवस्था थी, जी एस डी पी थी
66:47 वह 12 लाख 75 हजार करोड़ की थी और आज यह अर्थव्यवस्था साढ़े 27 लाख करोड़ को पार कर चुकी है यानि पिछले 8 वर्ष में यानि जो 70 वर्षों में जितने हम पहुंचे थे उससे दुगनी से अधिक हमने सफलता प्राप्त की है 8 वर्ष में वह भी तब जब 3 वर्ष कोविद महामारी से जूझते हुए हम लोगों ने कार्य किया है। पर कैप्टान कम 1947
67:18 से लेकर के 2017 तक कुल पहुँच पाई थी 46 हजार तक। आज यह लगभग 1 लाख 10 हजार तक पहुंची है मेरा यह मानना है उत्तर प्रदेश प्रकृति और परमात्मा की कृपा का असीम कृपा का प्रदेश है। हमारे पास युवा शक्ति है और ये बहुत प्रतिभाशाली युवा है। हमारे पास सबसे अच्छी फर्टाइल लैंड है,
67:48 सबसे अच्छा जल संसाधन है, देश का सबसे बड़ा एमएसएम बेस है, हमारे पास सबसे अच्छा इन्फ्रास्ट्रक्चर है पिछले 5 साल के अन्दर इन्फ्रास्ट्रक्चर को ठीक करना, युवा को, शक्ति को, अपनी युवा शक्ति को, उसको उसके इस स्केल को स्किल में बदलने की कार्रवाई के साथ बढ़ा कर के हमने आगे उसको तैयार किया है। अब हमें
68:18 अपनी स्पीड को बढ़ाना है और इसी स्पीड को बढ़ाने के लिए हम लोगों ने इस टारगेट को तय किया कि 2019 में यूपी वन टिलियन डॉलर की कॉनोमी होगा और देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था भी होगा।
68:34 वो ट्रिपल स वाली बात जो आपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ही एस एस एस
68:39 ये ट्रिपल एस के माध्यम से ही हम इसको आगे बढायेंगे।
Summary
- The speaker defines religion as a way of life encompassing duty and morality, not just worship.
- Spirituality is seen as a higher state of consciousness that can enhance one's understanding and actions in the world.
- The speaker discusses their involvement with the Nath community, highlighting its practical approach to spirituality.
- They reflect on the challenges faced when choosing a spiritual path, including family reactions and societal expectations.
- The importance of service as a foundational aspect of spirituality and leadership is emphasized.
- The speaker addresses the political landscape, asserting that a yogi can engage in politics without compromising spiritual values.
- They argue that the safety and well-being of all communities, including Muslims, are interconnected with the broader societal stability.
- The discussion touches on historical narratives and the importance of recognizing the contributions of various cultural figures in shaping India's identity.