Transcript
0:05 धापकायच धन्मस्य सर्वधर्मस्वरुम्पिने।
0:14 अवतारवरिष्ठाय रामकृष्णाय तेनमहा।
0:28 भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजमूढमते भजगोविंदम भजगोविंदं भजगुढमते
0:56 संप्राप्ते सन्निहिते काले
1:08 नही नही
1:10 रेक्षती दुखन करने नही नही रेक्षती डुकं करणे।
1:20 भजगोविंदम भजगोविंदम ओविंदम भजगोडमाते।
1:32 मुझ जहीः धनाजम त्रिष्टां।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
1:58 कर्मोपातं यल्लभसेनिज कर्मोपातं वित्तं तेनं विनोदयचीतं भजगोविन्दम
2:15 भजगोविन्दम भजगोविन्दम भजगोविन्दम भजगोविन्दम भजगोविन्दम भजगोविन्दम भजगोविन्दम
2:24 भजगोविन्दम भजगोविन्दम � वद्वीतो पाँजन शेकता हा ताँवन निजर परिवारों रेता हा यावद्वीतो पाँजन शेकता हा ताँवन निजर परिवारों रेता हा
2:48 पस्चाजीवति जंचर देगे पस्चाजीवति जैचे देगे वार्था
3:01 को पिन प्रिछति
3:09 गेखे भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम
3:19 भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम �
3:23 मा कुरुधन जन योवन कलमं हरतिनि मेशा
3:31 काल सर्मं
3:46 माया पयमिदं अघिलं माया मयमिदं
4:00 अखिलं खित्वा ब्रह्मपदं पं प्रविष विदित्वा
4:14 अजकोविन्दं
4:22 सुरमंदिरतरो
4:29 मूलनेवासहा सर्वपरिकाग
4:52 हो गत सर्मपरितः भोगत्यागः
5:01 कस्यसुकम्न करो
5:10 तिविरागः भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम
5:23 भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजवे कीता
5:27 किंचिद धीता भगवगीता किंचिद धीता गंगा जललंव काणिका पीता सगरद
5:54 पियेन मुरार सग्रदबियेन मुरारी
6:03 समर्चा
6:11 क्रियते तैस्या मेन चर्चा
6:24 भजगोविंदम भजगोविंदम
6:31 भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम
6:41 भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम भजगोविंदम पुनरभी जननम् पुनरभी मरनम् जठरे
7:06 शयनम् हुन रभी जननी यथरेशे यन्दमु।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
7:38 गेयं
7:50 गीता नामसदस्रं जेयं शीपति उपमजस्रं गेयं गीता नामसखस्रम् धेयं शीपति रूपमजस्रम् धेयं सजन
8:14 संगेचितम्
8:23 धेयं दीन जनाय जमीतम् देन्यूं दीन जेनाय जमीकं।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
8:46 अर्थमन अर्थम भावय नीत्यों नास्तितत सुखर लेश
8:55 सत्यों
9:09 उत्राद पिधन भाजम सर्वत्रैशापिधितारीतिः
9:32 भजगोविन्दं भजगोविन्दं
9:38 ओविदं भजपुधमते बोरु चरणा मुझे निभर भेत हा समुसार दचिरार भवमुत हा
10:06 सेन्दियमानस नियमा देवं
10:17 दरक्षसी निच रिदयस्तम देवं रच्चसीमीच रिदयस्तं देवं।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।।
Summary
- The chant "Bhaja Govindam" is a call to worship and devotion.
- Participants stress the futility of material wealth and the importance of spiritual enlightenment.
- The concept of life and death is addressed, highlighting the cycle of rebirth.
- The text encourages reflection on the nature of existence and the pursuit of higher knowledge.
- There are references to the teachings of the Bhagavad Gita, emphasizing the significance of understanding one's purpose.
- The importance of community and collective worship is implied through the group chanting.
- The chant serves as a reminder to prioritize spiritual growth over worldly attachments.