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LIVE:अजीत डोभाल का ऐतिहासिक भाषण | लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार 2026 समारोह, पुणे | Full Speech

Beyond Indian Headlines · 23m · transcribed Aug 2026
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Section Insights

# 0:00

Introduction and Acknowledgments

What is the significance of this gathering?

The speaker expresses gratitude to various dignitaries and acknowledges the importance of the occasion, which is related to India's freedom struggle.

  • The speaker emphasizes the importance of the event and the contributions of key figures in India's history.
  • Acknowledgment of the audience and dignitaries sets a respectful tone for the gathering.
  • The event commemorates significant historical figures and their sacrifices for India's independence.
# 4:44

Understanding Freedom

What does true freedom mean?

True freedom is not merely the ability to act on one's desires; it is rooted in the sacrifices made by those who fought for independence.

  • Freedom is linked to the struggles and sacrifices of past leaders.
  • The speaker highlights the importance of understanding the historical context of freedom.
  • A call to honor the legacy of freedom fighters and their vision for the nation.
# 9:28

Personal Reflections on Pune

What personal experiences shaped the speaker's connection to Pune?

The speaker shares memories of their early life in Pune, including their education and cultural experiences that left a lasting impression.

  • Personal anecdotes create a connection between the speaker and the audience.
  • The speaker reflects on the cultural and educational influences of their childhood.
  • Memories of community traditions highlight the importance of local culture.
# 14:12

The Role of Lokmanya Tilak

How did Lokmanya Tilak influence the freedom movement?

Tilak's leadership and vision were pivotal in inspiring a new consciousness among the youth and the public towards the struggle for independence.

  • Tilak's contributions are framed as foundational to the independence movement.
  • The speaker emphasizes the need for collective courage and action in the face of oppression.
  • A call to embody the spirit of Tilak in contemporary struggles for justice.
# 18:56

Vision for Development

What is the speaker's vision for India's future?

The speaker envisions a powerful and developed India, emphasizing the importance of leadership and collective effort in achieving national goals.

  • A strong emphasis on unity and collaboration for national development.
  • Recognition of current leadership as a positive force for change.
  • A motivational call to action for citizens to contribute to the nation's progress.

Transcript

Speaker 1

0:12 धन्यवाद। बहुत बहुत धन्यवाद। आप लोगो का, भारत के माननीय गृहमंत्री आदरनीय श्री अमित शाह जी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री माननीय श्री देवेन्द्र फडnvीजीउपमुख्ं,

Speaker 1

0:43 माननीय श्री एकनाथ शिंदे जी, उपमुख्यमंत्री माननीय श्रीमती सुनेत्र ताई, परमार जी, तिलक, स्वराज स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉक्टर रोहित तिलक और इस ट्रस्ट के अन्य सदस्य, मंच पर, आसीन सभी महान भाव गण और इस सभा में उपस्थित गणमान्य, देवियों

Speaker 1

1:13 और सज्जनों आप सब को मेरा अभिवादन मैं। इस वंश पर, यहाँ पर आकर अपने को 1 बड़ी ही समझ की स्थिति में समझता हूँ। मैं धन्यवाद देता हूँ माननीय गृहमंत्री जी का, मुख्य मंत्री जी का,

Speaker 1

1:44 का, सभी लोगों का जिन्होंने, मेरे बारे में कहा सत्य क्या है ये तो शायद मुझे भी नहीं मालूम। पूरा मेरे बारे में आप ऐसी धारणा रखते हैं, मैं इसके लिए आपको नमन करता हूँ। मेरे पास शब्द नहीं है, मैं आप लोगो को धन्यवाद दे सकू साथियो,

Speaker 1

2:16 आज 1 विशेष दिन है, यह विशेष दिन है हमारे राष्ट्र के, स्वतंत्रता संग्राम के, प्रेशक, स्वतंत्रता संग्राम के 1, अद्भुत सेनानी, फिलोसॉफर मार्ग, दर्शक, उनकी 100, ये मेरा सौभाग्य

Speaker 1

2:46 है कि मैं आज पुणे में जो उनकी कर्मभूमि थी और आप सब लोगो को जो पुणे के निवासी हैं, उनके साथ, मिलकर उनको अपने श्रद्धा, सुमन और श्रद्धांलि प्रेषित करता हूँ। मैं दिवंगत आत्मा को नमन करता हूँ और उनकी आत्मा के लिए ईश्वर से प्राथना करता हूँ। आज का दिन, ये ही दिन

Speaker 1

3:16 हैं की जब हमें स्वयं को फिर सोचने की आवश्यकता है। मान्य गृह मंत्री जी ने इस पर बल भी दिया की उनकी प्रासंगिकता खत्म नहीं हुई। आज भी जो उन्होंने कहा था 1 बार हर भारतीय को, विशेष कर हमारे युवाओं को यह सोचने की आवश्यकता है के जिस मार्ग पर जो भारत की उनकी कर्पर्कल्पनाथा वो क्या थी और क्या

Speaker 1

3:46 था राष्ट्र निर्माण का, मैं इस पुरस्कार के लिए बहुत आभारी हूँ, धन्यवाद देता हूँ तिलक स्वराज, संघ, लोकमान्य तिलक, स्मारक ट्रस्ट को और मैं इसे विनम्रता से स्वीकार करता हूँ। मैं गौरव, गवरवरणिदीहूँ और नतमस्तक भी लोकमान तिलक जी

Speaker 1

4:18 के जीवन को समझना, उनकी गहराइयों को देखना, उसके लिए उस समय के काल, उस समय के मजबूरियां, कुछ समय की दयनीयता को, शायद हम लोग उसकी कल्पना नहीं कर पाते, विशेषत जो हमारा युवा वर्ग है, वो सोचता है कि शायद भारत हमेशा ऐसा ही था जिसे हम स्वतंत्रता कहते है। शायद उनको लगता है कि स्वतंत्रता केवल वह करने की

Speaker 1

4:48 जो आपकी इच्छा है। स्वतंत्रता यह नहीं की जिन लोगों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों को निछावर किया, जिन लोगों ने इसके लिए संघर्ष किया, जिन लोगों ने हमें इसका नेतृत्व दिया, लोक मान्य तिलक उसके सिरमौर थी, उसके उनका जो था, उनका जो समय था उस वक्त तक वो आवाज उठाने की हिम्मत

Speaker 1

5:18 बहुत लोगो में नहीं थी, लोगो में 1 त्रासदी, 1 पीड़ा थी, 1 वेदना थी, 1 करा रहा था समाज, लेकिन जो चाहते भी थे, कुछ बोलना वो यही कहते थे की हम किसी तरह से कोई रास्ता निकाले बातचीत करके, इनके कुछ संयम का प्रयोग करके, लेकिन वो कठिन रास्ता मुकाबला करके और इसको जीत के ले ये शायद,

Speaker 1

5:49 ये इसका नेतृत्व और इसका भाव उन्होंने ही देश को दिया। दासता की बेड़ियों को उन्होंने जोड़ने के लिए देश के युवकों देश की जनता में 1 नई चेतना और पौरुष का पादुर्भाव किया, चाहे उनका त्याग और उनकी सेवा चाहे महाराष्ट्र का प्लेग हो जिसमें उनके अपने पुत्र 21 वर्षीय विश्वनाथ का

Speaker 1

6:20 को भी को भी अपने प्राण देने पड़े लेकिन उसके बाद भी पुणे छोड़ के नहीं गया। यहाँ पर लोगो की यातना थी, उन्होंने सोचा यह मेरा कर्तव्य भी है व समाज से और ये पुणे तो 1 धरती इसके अन्दर में यह वीरों की धरती है। यहाँ पर त्रि महाराज, शिवाजी, महाराज, पेशवा, बाजी, राव, माला, जी, मासरेमराजीबाईदेश पांडे

Speaker 1

6:51 जैसे कई वीर योद्धाओं ने अपनी वीरता का रखे हैं जो इतिहास में 1 अदितीय है और उसके साथ साथ यह 1 विचारकों की समाज सुधारको की धरती रही है। यहाँ पर महर्षि, गोपाल, गणेश, आगरकर, सेनापति, बापट आदि जो है वो सभी हमारी श्रद्धा के पात्र हैं और इसके

Speaker 1

7:21 पीछे यदि आप देखे तो इन दोनों धाराओं की जो जो उद्गम है वो थी भारत की सांस्कृति और धार्मिक विश्वास लोगो का और उस पर उनका 1 पूर्ण वो चाहे योद्धा थे। तब भी उनको अपनी संस्कृति, अपने धर्म, अपने सरकार, अपने, उसका बहुत बड़ा मान भी था और ज्ञान भी था। लोकमान्य तिलक जी के बारे में

Speaker 1

7:51 तो वो इन तीनों धाराओं का सम्मिश्रण करते है। उनमे शौर्य और दृढ़ संकल्प भी था। वीरता शौर्य का वो उसमे समाहित था जिसमें वो अंग्रेज सरकार को चुनौती देते थे और कहते थे की स्वतंत्रता मेरा जन्म सिद्ध धिकार है, चाहे उनको मन की जेल जाना पड़े, चाहे उन्हें यात्राये सहनी पड़े लेकिन

Speaker 1

8:21 उन्होंने उनसे कहा भी गया आपअपन को साफ करें तो हम आपकी उनको कम करते थे, शायद माने नहीं जाना पड़ेगा, देश निकाला नहीं होगा लेकिन उन्होंने वो नहीं किया और उसी के साथ साथ समाज सुधारक उन्होंने समाज की सेवा की, चाहे वो प्ले था, चाहे बीमारी थी चाहे लोगो में यात्रा की और साथ साथ वो 1 विचारक उन्होंने जो गीता का वो लिखा तो उनकी विशेषता यह है की वो इन

Speaker 1

8:51 तीनों धाराओं का 11 त्रिवणी, तीनों धाराएं प्रबल थी और हर 1 अपने रूप में उसका कोई दूसरा नहीं। गृह। मंत्री ने कहा पुस्तक फिर हम लोग पढ़े जो उन्होंने गीता का सार अपने अंदर में लिखा है, जो वो है वो पढने लायक जीवन को 1 नई दिशा देता है।

Speaker 1

9:21 पुणे से 1 छोटा सा सम्बन्ध मेरा भी है। आज से लगभग 76 वर्ष पूर्व मैं इस शहर में आया था, जब मेरे पिता आर्मी में यहाँ पर पोस्ट। इस सभागार में बहुत कम लोग होंगे जो उससे पहले कुछ ही लोग होंगे जो उससे पहले पुणे में आये होंगे। जब मैं आया और मैंने स्कूल की पढ़ाई

Speaker 1

9:52 यहीं से सुनी मैं लगभग सवा साल डेढ़ साल यहाँ रहे, उसके बाद मेरे पिताजी की हो गई लेकिन मैं यहाँ पर रहा। वो डेढ़ साल बहुत सारी चीजें तो मैं भूल गया लेकिन 2 चीजें मुझे या 1 तो है। हर मंगलवार को मेरी माँ का मुझे ले के चतुर सिंह

Speaker 1

10:22 देवी के मंदिर में वो हमारे यहाँ 1 तरह की बड़ी मोटी सी रोटी बनाते है, उसको रोड कहते है, उसको काटते थे होती थी, उसके अंदर में उसका भोग चढ़ाते थे और कुछ और चीजों का भोग चलाते थे जो घर में आके हम लोग खाते थे तो हमें अच्छा लगता था। उनकी बड़ी आशा थी और दूसरी थी की हमारे स्कूल में 1 परम्परा थी की प्रार्थना के बाद में 1 एसम्बली होती थी जिसमे कोई वरिष्ठ टीचर

Speaker 1

10:52 कुछ व्याख्यान देते थे, 10 15 मिनट के लिए, किसी मोरेलिटी के शो पर, किसी पुरुष के जीवन पर विद्यार्थी यों क्या करते थे, कुछ भी अच्छी बातों पर हमारे हिंदी के बहुत ही अच्छे, बहुत अच्छे वक्ता भी थे। लोकमान्य तिलक के जीवन पर 1 वचन दिया था और उसके बाद में पुन के में उनके बारे में मुझे पता लगा। तो मेरा पहला जो एक्सपोजर हुआ लोकमान तिलक जी के जीवन

Speaker 1

11:22 के बारे में। 5 साल स्कूल में हुआ, मैं कल्पना भी नहीं कर सकता था की 76 सेवंटी सिक्स एस के बाद मैं फिर इसी पूना की धरती पर, किसी दिन उनकी स्मृति में बनाये हुए पुरस्कार को प्राप्त करने के लिए यहाँ पर हाजिर होंगे। ये मेरा सौभाग्य दी। साथियों उनके योगदान को समझने के लिए

Speaker 1

11:55 हमें टाइम क्लॉक में पीछे जाना पड़ेगा। कैसा समय था हल्की हत्या कहते हैं, बड़ी प्रॉब्लम थी, शायद यह नहीं रहा। आजकल के लोग जो अपने राइट्स की बात करते हैं, उनको ये नहीं पता की इन राइट्स को अगर हम म्यूस करेंगे तो शायद जिन लोगों ने इन राइट्स के लिए अपना इतना सर्वस्य त्याग किया, उनकी आत्मा को कितना कष्ट पहुंचेगा।

Speaker 1

12:25 हिंदी में पहला गद्य साहित्य में 1 नाटक लिखा गया। उसका नाम था भारत दुर्दशा। 1850 में भारतीय 2 हरिश चंद्र जिन्होंने हिंदी में गद्दे लिखने की परम्परा शुरू की थी, उससे पहले पोइट्री थी, कविताएं जाती थी, 7 में लिखने का वो नहीं था, 12 पहले प्रयास हुए थे, लेकिन वो

Speaker 1

12:56 कामयाब नहीं हुई। उसको यदि आप पढ़े उसमे उन्होंने 1 चित्रण किया है की भारत की क्या वस्था था, कितनी यातना थी, कितनी वेदना थी, कितना अत्याचार था और उसके बाद भी किसी में आवाज उठाने की हिम्मत नहीं थी।

Speaker 1

13:31 उस अत्याचार में अंग्रेजो की वो तो था लेकिन उसके साथ साथ हमारे देश में भी 1 वर्ग था, जो शायद इस बात को नहीं समझता था कि देश की स्वतंत्रता और उसके लिए वो अपने निजी स्वार्थो के लिए, उसको उसका करते है, उसका उसको स्वीकार करने को तैयार

Speaker 1

14:01 नहीं है, चाहे वो छोटे जमींदार थे या रजवाड़े थे, ये थे उन इलाकों में तो और भी अधिक ा भारत की दुर्दशा के काल में देश के विभिन्न भागों में 1 शो शुरू हुई, लेकिन 1 सबसे बड़ी जो प्रारंभ हुई, 1 फिल्म वो महाराष्ट्र में थी और जिसका नेतृत्व जो है वो लोकमाणयतिलकजीने कहा।

Speaker 1

14:33 उन्होंने केवल नारा नहीं दिया की स्वराज मेरा जन्म से दैत्यकार है और मैं इसे लेकर रहूँगा। यह उनका सिंह था। ये 1 नए इतिहास की रचना का 1 बड़ा विजन और इसमें महत्वपूर्ण स्पष्ट ये तो था ही, स्वराज मेरा जन्म अधिकार है उससे बड़ा जो वक्त जो क्लास था वो ये था और मैं इसे लेकर रहूँगा,

Speaker 1

15:04 ये धारणा जो थी ये विश्वास जो था उनका, और ये मनोबल जो था उनका, वो चाहते थे कि देश के हर नागरिक का, ऐसा ही मनोबल बने कि मैं इसे लेकर लेकर ही रहूँगा। हमें बताया गया की आज भी वो प्रसांगिक हैं, अगर वो आज होते तो क्या कहते तो हमें क्या नया

Speaker 1

15:35 स्लोगन देते, 1 न देते तो शायद वो कहते है की भारत को सशक्त और विकसित बनाना मेरा जन्मसिद्ध कर्तव्य है और मैं इसे करके ही रहूँगा। आज का अगर हमारा आज, हमारा भारत का बाद, देश को आजादी मिली है, तो मैं इसको शक्ति बना कर रहूंगा।

Speaker 1

16:05 मैं इसे जीवन की आखिरी सांस तक मैं इसके लिए जो भी कर सकूँगा करूँगा इस भावना को। अगर आज हम अपने समाज में, अपने युवाओं में, आने वाली पीडियों में अगर वो कर सके तो यह हमारा बहुत बड़ा होगा। बहुत बड़ी बात कही गई थी की कमाल का ये विचार था कि जब तक जनता के अन्दर में वो विचार नहीं आएगा, वो सेंटिमेंट क्रिएट नहीं होगा, राष्ट्र भाव का सेंटिमेंट क्रिएट

Speaker 1

16:35 नहीं होगा। जहाँ पर आप अपने सभी इच्छाओं को गौण करके राष्ट्र हित को सर्व परिषद दे, तब तक राष्ट्र का निर्माण और राष्ट्र का विकास और राष्ट्र सुरक्षा सम्भव नहीं होगी। देखिये हम लोग स्ट्रैटेजी में लोग मुझसे अक्सर पूछते है की क्या करना चाहिए तो काफी कंफ्यूजन होता है, कई रास्ते दिखाई देते है, कौन सा सही है? 1 भ्रम की दशा कहते है, जीवन के

Speaker 1

17:05 अन्दर में अपेक्षाएं आशाएं इच्छाएं, आकांकतोसभीको और हम सभी इंसान हैं, तो सभी तरह, लेकिन हम वेड एनालिसिस करते हैं, वाइटल क्या है, एसेंशियल क्या है, डिजायरेबल क्या है? और यदि राष्ट्र सेवा हमारे लिए वाइटल है, अगर राष्ट्र को शक्तिशाली बनाना हमारे लिए वाइटल है, तो उसके सामने बारिश की सारी चाय जो है वो गौण हो जाती है,

Speaker 1

17:36 एशेशनऔरडिजाइरबल होती है, वो गलत नहीं होती, शायद उसका कुछ लेजिटमेनटवोभीहो परन्तु क्यूँकी वो नेशनल के आगे है, तो हम कम किसी राह में नहीं जायेंगे, जो की हमारे को, हमारे राष्ट्र को नुकसान पहुँचाता है, चाहे मेरा निजी फायदा हो, चाहे उसमे मेरे वर्ग का, मेरे गाँव का, मेरे जाति का, कुछ भी हो, नहीं

Speaker 1

18:07 तो वो मेरे हित में नहीं। आज अगर हम 1 नए संकल्प ने 1 नए भारत को बनाने के लिए, इससे शक्तिशाली करने के लिए, तो हमारे लिए शायद यह 1 हम 1 नए इतिहास का निर्माण करे। भारत कभी वहाँ नहीं पहुँचा जाँव, से होना चाहिए, ऐसा लगता है की शायद अब हम स्वतंत्र हैं, तो हमारे ऊपर खत्म हो गयी है।

Speaker 1

18:37 आज भी भारत को बाहर से भी और अंदर से भी बहुत अधिक चुनौतियाँ है। भारत का विकास से सभी लोग बहुत आनंदित हो, ऐसा नहीं है। भारत का विकास कई लोगों के लिए, कई देशों के लिए, कई इंटर के लिए, उनके लिए, और हमे उसका मुकाबला क्या

Speaker 1

19:07 है, उसके लिए। 1 तीर के साथ संशय को हटाकर, संशयात्मा, संशय, मे को, देश के सोए देश के इंटरेस्ट पर काम करके अपने हर को आप आगे बढ़ाने के लिए अगर 1 हो के चले तो उतनी दूर भी नहीं है। आज हम बहुत भाग्यशाली हैं हमारे देश में 1 ऐसा नेतृत्व है हमारे देश के अन्दर

Speaker 1

19:37 1 ऐसा वातावरण है जहाँ पर हम अपने आप को शक्तिशाली बना सकते है मानिए मोदी जी, अमित शाह जी, सभी लोग इतने 1 जुट होकर काम करे मुझे तो गृह मंत्री जी के साथ काफी क्लोज़ली काम करने का सौभाग्य मिला है मैंने उनके देश हित के प्रति जो कमिटमेंट देखी है, उनका जो विश्वास देता है और उनकी जो जता देती है और केविन और

Speaker 1

20:08 कभी किसी को नहीं होता वो बड़ी श्रद्धा का लिमिटेड काम होता है लेकिन जो उन्होंने देश के लिए किया है, जो प्रधानमंत्री जी ने देश के लिए किया है, यह शायद इस देश को आगे बढ़ाएं, हमें उसको आगे बढ़ाने की कोशिश करें कि 1 बहुत बड़े हिंदी के कवि थे, कुछ लोगों ने यहाँ पर वो कविताएँ पढ़ी हमारे मुख्य मंत्री जी ने भी कही तो बहुत अच्छा था

Speaker 1

20:40 उनका नाम था रामधारी सिंह दिनकर गुलामी के टाइम पर उन्होंने 1 कविता लिखी थी मैं चाहता हूँ की सब लोग समय मिले 1 छोटी सी कविता है 15, 16, 20 लें उसको पढे तो और उसको उसका नाम है आग की भी उसमें उन्होंने कई बातें लिखी हैं और

Speaker 1

21:10 अच्छी कविता है रोंगटे हिला देने वाली कविता है लेकिन उसमे कुछ सोचने का विषय भी था और कभी जो है ईश्वर से प्रार्थना कर रहा है, मांग रहा है वो ईश्वर से वरदान मांगने के लिए जाता है तो कहता है क्या चाहिए मुझे की तम वेदनी किरण का संधान मांगता तम् अंधेरे को कहते हैं जो तम को बेच सके

Speaker 1

21:42 रू बजे तम वेदनी किरण का संचार मांगता हूँ जड़ता विनाश को फिर भूचाल ये जो है जो की आपको भ्रमित कर देता है, आपको उन दिशाओं में ले जाते हैं, आप देश की, राष्ट्र की, मानवता की, समाज की जो सही दिशा है उसको छोड़ कर आप निजी इंटरेस्ट की दिशा में चले जाते हैं,

Speaker 1

22:12 आप चले जाते है, पॉपुलर चले जाते हैं। विकास सदा लहू में संचार मांगता हूँ, प्यारे स्वदेश के हित अंगार मांगता हूँ तो दिनकर की वो जो ललकार थी के प्यारे स्वदेश के हित विषका सदा लहू में संचार मांगता हूँ, तूफान मांगता हूँ, विस्फोट मांगता

Speaker 1

22:42 हूँ, आज का जो यौवन है, आज का जो है वो करे, पूर्ण रूप से ये सोचे करूँगा, अगर मेरे छोटे मोटे इंट्रेस्ट हो भी चाहे कुछ हो उनको मैं नजरअंदाज करूँगा वो बात की बात है अभी तो देश को बनाना है, ये वो समय है जो हम गंवा नहीं सकते, ये 11 विंडो ऑपर्चुनिटी इस देश के इतिहास में आई है

Speaker 1

23:13 और मुझे आशा है की हम लोग इसको कामयाब सिद्ध होंगे और अपना 1 नया इतिहास बनायेंगे। बहुत बहुत धन्यवाद जय हिन्द जय भारत बहुत बहुत शुक्रिया डोवाल साहब आपका जागरण हल वनदेमातरम कार्यक्रम वंदे मातरम लबाब।

Summary

The speaker expresses gratitude to various dignitaries and reflects on the significance of the day, which commemorates the contributions of Lokmanya Tilak to India's freedom struggle. He emphasizes the importance of understanding the sacrifices made for independence and the need for continued commitment to nation-building.

- Acknowledges the contributions of Lokmanya Tilak and other freedom fighters.
- Stresses the relevance of Tilak's ideals in today's context, especially for the youth.
- Highlights the sacrifices made by leaders during the freedom struggle.
- Encourages a renewed commitment to national service and development.
- Reflects on personal connections to Pune and its historical significance.
- Urges the audience to prioritize national interests over personal gains.
- Calls for unity and collective effort to strengthen and develop India.
- Concludes with a hopeful vision for the future and the importance of seizing current opportunities for progress.

Questions Answered

What is the significance of this gathering?

The speaker expresses gratitude to various dignitaries and acknowledges the importance of the occasion, which is related to India's freedom struggle.

What does true freedom mean?

True freedom is not merely the ability to act on one's desires; it is rooted in the sacrifices made by those who fought for independence.

What personal experiences shaped the speaker's connection to Pune?

The speaker shares memories of their early life in Pune, including their education and cultural experiences that left a lasting impression.

How did Lokmanya Tilak influence the freedom movement?

Tilak's leadership and vision were pivotal in inspiring a new consciousness among the youth and the public towards the struggle for independence.

What is the speaker's vision for India's future?

The speaker envisions a powerful and developed India, emphasizing the importance of leadership and collective effort in achieving national goals.

© transcribe · For agents Built with care and craft by Gokul Rajaram