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Chetana + Living according to the eight fold path.

AVT · 16m · transcribed Jul 2026
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Section Insights

# 0:00

Understanding Intentions

What is the significance of being aware of our intentions?

The speaker emphasizes the importance of being vigilant about our intentions, as they can differ from our superficial actions. A clear intention leads to a more fulfilling and regret-free life.

  • Awareness of intentions is crucial for meaningful actions.
  • Superficial actions may mask deeper intentions.
  • Clarity in intentions prevents future regrets.
# 3:12

Inner vs. Outer Reality

How do internal perceptions influence external experiences?

The speaker suggests that suffering originates from within rather than external circumstances. Aligning our internal state can lead to a harmonious external experience.

  • Suffering is an internal issue, not an external one.
  • Aligning internal perceptions can improve external interactions.
  • True change begins from within.
# 6:25

Changing Perspectives

How can changing our perspective impact our actions?

The speaker highlights that changing our viewpoint on life influences how we perceive and interact with the world. It is not about changing the world but altering our perspective towards it.

  • Changing perspective can transform our experiences.
  • Our view of the world shapes our actions.
  • True change is about internal shifts rather than external modifications.
# 9:37

The Nature of Change

What is required for genuine transformation?

The speaker argues that true change occurs when our perspective shifts, not merely through practices or rituals. Understanding the impermanence of worldly attachments leads to liberation.

  • Real change requires a shift in perspective.
  • Practices alone do not guarantee transformation.
  • Recognizing the impermanence of attachments fosters liberation.
# 12:50

The Process of Freedom

What does the journey towards freedom entail?

The speaker discusses the process of recognizing and overcoming personal ignorance and suffering. This journey involves continuous self-reflection and understanding of one's true nature.

  • Freedom involves recognizing and addressing personal ignorance.
  • Self-reflection is key to understanding one's true self.
  • The journey to freedom is ongoing and requires effort.

Transcript

Speaker 1

0:02 जो आपने बात कही न की अभी तक जो हमने पढ़ा है उसमें मुख्य बात यही थी। दूसरी छोटी छोटी बातें भी थी। मुख्य बात यह थी की हमारे को अपने इंटेंशन प्रति सजग रहना चाहिए। ऊपर, ऊपर से जो हम काम करते हैं उसका 1 पेंट इनटेंशन होता है, अन्दर जाते हैं, देखते हैं गहराई से तो पता चलता है की इंटेंशन कुछ और है। तो अगर हम सजग नहीं है गहराई से और उसके साथ सती और सम्पन्य

Speaker 1

0:31 नहीं है, सिर्फ सती से काम नहीं चलेगा सम्पन्य है। हम इन्वेस्टिगेट कर रहे हैं कि हमारे जो एप्रेंट इंटेंशन है वो ये है रियल इंटेंशन कुछ और है। तो फिर हम उस जो दिक्कत आती है। 1 अच्छी बात थी की हमें कोई अपने जो हम कर्म करते हैं उसके बाद में पछतावा नहीं होगा। हमें उस बात पर भी खेद नहीं होगा की मैंने या ठीक से नहीं किया।

Speaker 1

1:03 अगर हमारा इंटेंशन क्लियर है और लाइन फोल सम्मा संग कप्पू। अगर हम इस्तेमाल कर रहे हैं तो फिर कभी भी इस तरह की दुविधा नहीं आएगी।

Speaker 2

1:18 उस वाणी से रिलेटेड क्या बोला है, वाणी से रिलेटेड, आपकी वाणी, वाणी से

Speaker 1

1:24 रिलेटेड, वो सब टांगिक मार्ग की बात है न। अगर हमारा इंटेंशन क्लियर है तो हमारी बनी उसी अनुसार होगी, हमारे कर्म के अनुसार होगी, हमारी आजीविका उसी के अनुसार होगी। अगर मेरा इनटेंशन है की मुझे मल्टी मिलिनियर बनना है तो मैं चालाक भी बनूंगा, कर्म भी ऐसे करूँगा की मुझे जल्दी से जल्दी मैक्सिमम वेल्थ हो जाए। आजीविका भी ऐसी ढूंढूंगा अगर मेरा इन्टेंशन यह है की मैं भगवान की शिक्षा के अनुसार

Speaker 1

1:54 अपना जीवन जी हूँ तो मैं पानी भी ऐसी रखूँगा की चालाकी से रिसीव न करूँ, बेशक उसमें मेरा फायदा न हो। मैंने कहा था कि पारी को फॉलो करने से प्रमोशन मिलने वाली नहीं है। लेकिन क्षेत्र में पीस रहेगी, शांति रहेगी, एजुकेशन नहीं रहेगी। तो इंटेंशन का तो बेसिकली। तो इंटेंशन हमारे जीवन को इंटेंशन गाइड करता है, दिक्कत ही होती है की हम इम्प्लिसित

Speaker 1

2:24 इंटेंशन में ऑपरेट करता है। बिल्कुल विदाउट और प्रॉपर रिफ्लेक्शन जो हैबिट से बन गया, लीफ के कारण बन गया, समाज के कारण बन गया, या कभी श्रद्धा के कारण बन गया तो हम उसको इन्वेस्टीगेट नहीं करते। कि मैं किस इन्टेंशन से काम करना और मुख्य बात मुझे लगी हो यह था की उसके ध्यान आकर्षित करना है और समझा रहे हैं कि

Speaker 1

2:55 इसके परिणाम हर स्तर पर आयेंगे। वाणी के भी कर्म पे भी आजीविका

Speaker 2

3:00 भी

Speaker 1

3:02 क्यूंकि लाकिक मार्ग में एक्चवलीतोइंटेंशन के पीछे ही प्रज्ञा है। फॉर मोस्ट थिंग इन rt view इफ वी हैव। फॉर्म राइट व्यू की हमको सफरिंग से बाहर आना है और सफरिंग के कारण बाहर नहीं है, अंदर है। तो फिर हमारी सारी चीजें आलाइन हो जाएंगी। you are view itself is on the nothing evीthingwgोरोन। सो इसी लिए सम्मा

Speaker 1

3:32 दिट्ठी। पहले कहा, फिर उससे सम्मा संकप आएगा, उससे राइट इंटेंशन बनेगी, फिर उसके हिसाब से राइट वो राइट स्पीच होगी, राइट एक्शन होंगे, राइट चॉइस करेंगे, जहाँ पॉसिबल होगा, अपनी आजीविका को भी बनायेंगे। इस प्रकार से हम अपने बाहरी संसार से जो हमारा व्यवहार है वो शुद्ध हो जायेगा। वी टेक केयर ऑफ़ दैट इन बेस्ट पॉसिबल ही क्यूँकी,

Speaker 1

4:02 बाहरी संसार से जो व्यवहार है, उसमे तो बहुत दिक्कत है। फिर उसके बाद जो लास्ट आस्पेक्ट मार्का, समावाय, सम्मा, सती, समा, समाधि, दे, आर अवर इंटरनल प्रोसेसेज हम अपने मन को सुधार रहे हैं। पहले हम बाहर के संसार से अपना रिलेशनशिप सुधारने का प्रयास और इंटेंशन अब उससे आगे बढ़ रहे हैं की भाई हमारे अन्दर भी मन को सुधारना, क्यूंकी, वो मन को सुधारेंगे। नहीं तो हमारे इनटेंशन एक्शन नहीं ले पाते। चाहे कुछ

Speaker 1

4:32 कर पाते हैं। तो इंटरनल एंड एक्स्टरनल बोध को हम मार्ग से रियोरिंटकरलेते है, दैट इज दी होल सेंस स और जो पार्मी risto wich fol the help स टू लाइन लाइफ हमारा जीवन जो है उसके

Speaker 1

5:03 हिसाब से लाइन हो जाता है। वर्ल्ड व्यू जो हमारा टांगिक मार्ग के अनुरूप हो, धीरे धीरे धीरे उसी बात स। अगेन विचार आएंगे अगर क्लैरिटी है तो उन विचारों को किनारे कर पाएंगे, क्लेरिटी नहीं है। अरे ये करूँगा हमेशा ही सच बोलूंगा तो वो नाराज हो जाएगा। वो क्या कहेगा, ये क्या कहेगा

Speaker 1

5:37 तो सी व आर गोइंग टू द कालिटी प्रायरिटी तभी जाकर हमारा परस्पेक्टिव संसार के बारे में, जीवन के बारे में, चेंज ऑफ वर्ल्ड चेंज ऑफ परस्पेक्टिव। तो the woर्डड हाव डू टू, द वर्ल्ड हाव डो सीट तकनीक ऐसा कर लो, ऐसा ऐसा करना

Speaker 2

6:06 सिर। फिर ऐसा मतलब मैं अभी तक थोड़ी दुविधा में थी की की जो लाइफ थोड़ी डिफ्रेंट हो जाती है। सौरी मैं अभी अपने पर्सनल लेकर आ रही हूँ किताब ऐसी में ही बात कर। बट ये जो आपने लास्ट में बोला की बोल्ड व चेंज करने के लिए। तो अगर आप 1 पार्ट ऑफ़ प्रैक्टिस कर रहे हैं जब वे प्रैक्टिस यू आर प्रैक्टिसिंग, मीन की आप वर्ल्ड थिंक में काम नहीं करोगे, बट यू हैव टू टेक

Speaker 2

6:37 धम्मा। और जो आपकी जो भगवान ने सिखाया है उसको इम्प्लीमेंटेशन करने के लिए, आरएस टांगिक मार्ग के लिए मैं उसको ऐसे लू की आई एम आई नीड टू एस्टेब्लिश इन आर एस टांगिक मार्ग मोर इन वोरल्डिफेंस। ऐसे में विचार कर रही थी वाई दिस इज हैपनिंग, कुछ कुछ तो रीजन रहेगा, मुझे समझ नहीं आ रहा है की

Speaker 2

7:08 कुछ हो जा रहा है और उसको मैं क्लियरली देख नहीं पा रही।

Speaker 1

7:14 तो

Speaker 2

7:16 इस बेटर वे तो स न न थैंक्यू। अभी पता नहीं है को

Speaker 1

7:25 लीव, वर्ल्ड रहना तो संसार में बिकी बन जाओगे। तो संसार में रह रहे हो। तो भी रहना पड़े को क्या क्या करना पड़ रहा है। देखो सो वी आर गोइंग। तो वर्ल्ड इस ओनली वर्ल्ड यू चेंज करने का मतलब नहीं है कि हम वर्ल्ड को चेंज कर रहे हैं। हम अपनी पर दृष्टि की जिस दृष्टि से संसार को देखते हैं, किस दृष्टि से जीवन को देखते हैं, उसको बदल रहा है दृष्टि दृष्टि को। समाज का मतलब

Speaker 1

7:52 यह है दृष्टि लुकिंग एट द वर्ल्ड इन डिफ्रेंट मेहनत ने बाद में मे पढा बहुत ही प्रेरणादायक बातें आती है, वो उसको अगर हम गलत इंटरप्रेट करेंगे तो फिर गड़बड़ हो जाती है। लोक दे वर्ल्ड एमटी पद में

Speaker 1

8:26 बच्चों ी जिस तरह आप गुरगुले को देखते है, जिस तरह 1 मृत कृष्णा को, मेराज को देखते है, वैसे ही संसार को देखिये। तो मृत्यु का राजा आपको देख नहीं पाएगा। मतलब आप मुक्त हो जाओगे। न डजनटमीनऑवर्बल्ड मीनिंग उसमें सार नहीं है। हम संसार में सार ढूंढते रहते है। यह दिक्कत, क्योंकि संसार में सार शब्द जुड़ा हुआ है। कहीं न कहीं तो होगा नहीं।

Speaker 1

8:56 यह बड़ी साधारण सी बात है। लेकिन बड़ी मुश्किल है हम को एक्सेप्ट करने। यह सिर मुश्किल। इसलिए धीरे धीरे। और ये काम धीरे धीरे होगा। मुझे समझ में आ गया। सारी बात और इम्प्लुमेंट क्यों नहीं हो रही, उसमें बड़ा गैप है। भाई। बहुत लम्बा, साधना करनी पड़ेगी धीरे धीरे धीरे। क्योकि मन को धीरे धीरे टेम कर सकते है। ट्रांसफॉर्म परफेक्शन डेट ली।

Speaker 1

9:26 बहुत टाइम लगता है बहुत जल्द। क्योंकि पुराने जो हमारे अनुशय हैं, डेटन टेंडेंसीज है, वो इतनी डीप है, उनको बदलने में बहुत टाइम लगेगा। वो बदलेंगे नहीं, हमारे भ्रम है की वो साधना कर लेंगे तो अपने आप बदल लें। ऐसा होता नहीं। वो बदलती तब है जब हमारी दृष्टि कोण बदलता है। स्टडी टीचिंग प्रॉपरली, फाइन की जो लेटन टेंडेंसी है, उनको चेंज करने के लिए कोई साधना नहीं। काम गी

Speaker 1

9:56 क्यूँकी वो तो इम्मीडिएटली ऑपरेट करेगी। आपने कुछ प्रिय देखा, आपको इमीडिएटली वो अच्छा लगेगा, उसको बदल नहीं सकते। आप के वेतन देखेंगे को रोका। वो 1 प्रैक्टिस है, उसे चेंज नही बना चेंज। कब होगा भगवान की शिक्षा में, जब हम उस संसार के प्रति अनित की, वो दुःख, वो नाम इतना पुष्ट हो जाए। जो मुक्ति

Speaker 1

10:28 बात आती है। ये देख लिया। यह मैं नहीं हूँ, मेरा नहीं है, मेरी आत्मा नहीं हूँ। दैट इट सेल्फ इस नोट गोइंग डेलिबरेट, उसके कारण संसार के प्रति निर्वेद जा। 5 खंडों के प्रति, 6 इंद्रियों आयतनों के प्रति कान नाक, सब के प्रति निर्वेद जाग जाता है। कि इस में कुछ रखा नहीं है, नजर आता है, वो भी परमानेंट है, और दिखाता है, वो भी पर्मानेंट है। गेट यू टू मच इम्पॉर्टेट स्टोर सो दैट इज प्रोसेस

Speaker 1

10:57 ऑफ़ फ्रीडम। जब तक निर्वेद भाव नहीं जागेगा, इस संसार के प्रति हमारा शम्मा संग कप्पो, संग, कप्पो दृष्टि कोण है। जो टेंशन है निष्क्रमण का, उसका मतलब ही भाग जाएंगे। मतलब संसार के सुख नहीं ढूंढे सुख भी आएगा, दुख भी आएगा,

Speaker 1

11:28 कभी मन शांति भी हो जाएगा, कभी मन बेचैन भी होगा। होता रहता है कोई बात सो। then we come to a state that act mind not setas are able to mind is set, mind is as that will state will happen। वन वी डेली डेवलप de sense disenchantment with the wordly pleasures kinds

Speaker 2

11:58 कॉंस्टेंटली सौरी मैं कंस्टी वी वांट टू कीप a pedेcटim एंड द मोमेंट वो वो हम कहते है जैसे की हम 1 उपाधि के लिए बात करते हैं, लेकिन मेरे को लगता है की हम 1 कांस्टेंट प्रोसेस में रहते हैं कि अपने आपको इस तरह पर ऐसा करे।

Speaker 2

12:28 तो ये वाला जो दिमाग है, सदर रहा है आई कैन सी दैट और अनकंफर्टेबल तो नहीं बोलूंगी लेकिन मेरे को लगता है की 1 अपने आप को रखने की कोशिश रहती है तो ये भी तब ऐसा लगा की जैसे ये भी 1 तरह से मुश्किल वाला काम

Speaker 1

12:49 कर दिया मैंने कॉर्नेशन ऑफ दिस फैक्ट इस वेरी ग्रेट रिकॉगनाइज की मैं ऐसा कर रही हूँ, वो बहुत बड़ी बात है, साल है उस रिकॉर्डेनेशन सी अपने आप धीरे धीरे वो छूट जाएगा, लेकिन मैंने रिकॉर्गेनाइज कर लिया छूट सा नहीं होने वाला, ट्वेंटी लोग ड्रोन प्रोसेस ऑफ़ सींग अपनी मूर्खता को बार बार देखना, बार बार देखना कब तक इस प्रोसेस ऑफ़ फ्रीडम, we actually, rise, abou it

Speaker 1

13:21 जैसे हम बार बार उदाहरण देते हैं, न बचपन में खिलौने खेलते थे, अब हम वो इंटरेस्ट नहीं करते। resonaboutthaso the whole proses of fredom is rising about the word dispar suffring word happen rाइजaबाइच, you see this a पार्ट ऑफ़ human नस भी have that level of कलैरिटी 10 सी है देखो बच्चों की तरह मैं अपने आप को 1

Speaker 1

13:51 महत्व देना चाहता हूँ की मैं हूँ, इसलिए मैं बार बार आपको सुनाता रहता हूँ, जो डेफिनेशन भगवान ने दिए। न निर्माण बहुत ही पावरफुल है, जस कॉंटेंपलेशन, वेतन, संतान, एतनपनीतं, ये शांत हैं। एक्सीडेंट है दिदंग

Speaker 1

14:21 सब्बसंखारसमतो सारे संस्थानों का उपशमन शांत हो जाना, सब उपाधि पटनी, सारी, उपाधियों को त्याग कर देना, तन्हा खयो हो जाना, विरागोस्पैशनडेवलप हो के बाद रमानी आएगा सो, इस बात को हम अगर याद रख ले

Speaker 1

14:52 रिपीटेडली रिमाइंड फाइंड संस्कार भी है, दी भी जा ती है, ता भी है, डिस्कशन नहीं है, कोई बात नहीं, धीरे धीरे, धीरे धीरे उस डायरेक्शन में मूव कर रहा है। इस द वे टू, इनशोर ठीक से हम इस क्राइटेरिया को अप्लाई करके रहेंगे, सब ठीक होगा, पर जल्दी न कई बार हम से बेचैन हो जाते हैं।

Speaker 1

15:22 इतने साल हो गए है अभी कुछ धीरे धीरे होता है ट्रांसफर्मेशन ऑफ व्यू the transformation of the red we look at the its a very big for us।

Speaker 2

15:39 थैंकयू थैंकयू सम,

Speaker 1

16:01 थैंक्यू सर, थैंक यू पुनमजी।

Summary

The discussion emphasizes the importance of being aware of one's intentions in life and how they guide actions and decisions. It highlights the need for clarity in intentions to avoid regrets and to align one's actions with deeper values, ultimately leading to a more fulfilling life.

- Awareness of intentions is crucial for meaningful actions.
- Surface-level intentions may differ from deeper, true intentions.
- Clarity in intentions prevents regret and confusion in actions.
- Intentions shape our speech, actions, and livelihood.
- The process of self-reflection helps in understanding true intentions.
- Internal transformation is necessary for external behavior change.
- Disenchantment with worldly pleasures leads to a clearer perspective on life.
- Transformation takes time and requires consistent practice and reflection.

Questions Answered

What is the significance of being aware of our intentions?

The speaker emphasizes the importance of being vigilant about our intentions, as they can differ from our superficial actions. A clear intention leads to a more fulfilling and regret-free life.

How do internal perceptions influence external experiences?

The speaker suggests that suffering originates from within rather than external circumstances. Aligning our internal state can lead to a harmonious external experience.

How can changing our perspective impact our actions?

The speaker highlights that changing our viewpoint on life influences how we perceive and interact with the world. It is not about changing the world but altering our perspective towards it.

What is required for genuine transformation?

The speaker argues that true change occurs when our perspective shifts, not merely through practices or rituals. Understanding the impermanence of worldly attachments leads to liberation.

What does the journey towards freedom entail?

The speaker discusses the process of recognizing and overcoming personal ignorance and suffering. This journey involves continuous self-reflection and understanding of one's true nature.

© transcribe · For agents Built with care and craft by Gokul Rajaram