Section Insights
Introduction to Kashi
What is Kashi known for?
Kashi, also known as Varanasi or Banaras, is one of the oldest and holiest cities in India, famous for its culture, history, and beautiful ghats along the Ganges River.
- Kashi is a significant cultural and spiritual center in India.
- The city is renowned for its ancient traditions and historical significance.
- Varanasi offers unique culinary experiences that have been passed down through generations.
Visiting Shri Kashi Vishwanath Temple
What should visitors know about visiting the temple?
Visitors to the Shri Kashi Vishwanath Temple should be aware that photography is not allowed inside, and there may be long waiting times to enter, depending on the time of day.
- The temple is a major pilgrimage site attracting devotees from around the world.
- Visitors should plan their visit considering the potential wait times.
- Personal belongings may need to be managed carefully due to temple regulations.
Local Cuisine Highlights
What are some must-try local dishes in Varanasi?
Varanasi is famous for its kachoris served with chole, which are popular among locals and visitors alike. The dish is known for its affordability and delicious taste.
- Kachoris with chole are a local delicacy that should not be missed.
- The affordability of local food makes it accessible to everyone.
- Local eateries often have a rich history and loyal customer base.
Traditional Food Preparation
How is traditional food prepared in Varanasi?
Traditional food in Varanasi is often prepared using methods that involve hand-operated machinery, showcasing the local culture and culinary practices.
- Food preparation methods reflect the cultural heritage of the region.
- Local ingredients are often used to create authentic flavors.
- Visitors can experience a glimpse of traditional cooking techniques.
Unique Beverage Experience
What is a unique beverage to try in Varanasi?
Hajmola tea, made with ginger and mint, is a unique beverage available in Varanasi, known for its refreshing taste and digestive benefits.
- Hajmola tea is a local specialty that combines traditional flavors.
- It is often served at specific tea stalls, making it a unique experience.
- The drink is popular among locals and offers a taste of Varanasi's culinary diversity.
Transcript
0:02 दोस्तों, आज हम पहुँचे हैं भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शहर काशी में जिसे कोई बनारस तो कोई वाराणसी के नाम से जानता है। गंगा मैया के किनारे पर बसा हुआ यह पवित्र शहर अपनी संस्कृति, इतिहास और घाटों की सुन्दरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इसके साथ साथ वाराणसी की इन तं गलियों में ऐसे जायके हैं जो सालों नहीं बल्कि पीढ़ियों पुराने है और स्वाद की दुनिया में अपनी अलग पहचान रखते हैं। तो चलिए
0:29 शुरुआत करते है भारत के इस प्राचीन पवित्र शहर में, हमारे पहले दिन की चलिए हर हर महादेव दोस्तों, इस समय में पहुँच चुका हूँ श्री काशी विश्वनाथ धाम मेरे ठीक सामने आ द्वार के दर्शन कर सकते हैं और मैं आपको बता दूं। ये वो पावन पवित्र स्थान है जहाँ पर देशों
1:00 से, विदेशों से शिव भगत आते हैं, लम्बी लम्बी लाइनें लगी हुई हैं, अंदर फोटोग्राफी अलाउड नहीं है इसलिए मैं आपको दर्शन नहीं कर पाऊँगा और 1 और चीज बता दूँ। अगर आपके पास बैग्स हैं, छोटा बैग है, बड़ा बैग है, मोबाइल फ़ोन है, स्मार्ट वॉच है तो यहाँ पर प्राइवेटली लोकर बने हुए है एवं मंदिर परिसर की ओर से भी जगह जगह पर प्लेसिस बने हुए हैं जहाँ पर आप जमाकर करवा सकते है। तो चलिए मेरे
1:25 साथ 1 बार दोबारा से बोलिए हर हर महादेव जय शिव बोले बरदारी। तो बात ये है की ठठेरी बाजार में हम पहुंचे थे आम भंडार पर जहाँ की
1:55 कचौरी बहुत ज्यादा फेमस है, इतनी ज्यादा फेमस है की शायद सबसे ज्यादा फेमस है वाराणसी, लेकिन यहाँ पर आकर पता लगा कि जो इनकी दुकान है वो आज बंद है, इनकी पुरानी इनकी पुरानी दुकान है जो आज बंद है ठठेरी बाजार में, लेकिन भैया ने बताया की इसी गली के ठीक सामने आज इनकी 1 नई दुकान खुली है जो बहुत बढ़ी है, इतनी बढ़ी है कि वहाँ पर कई सौ लोग जो है वो पूरी 1 साथ
2:18 खा सकते है। तो आइये हम भी चखते हैं क्योंकी रिकमेंडेशन बहुत मिली थी की ये बहुत बहुत ज्यादा फेमस है, आगे चलते हैं तो फाइनली पता लग गया है की इस गली के अन्दर जो है वो उनकी नई दुकान हैं। आइये अन्दर चलते हैं
2:53 तो भाई साब यहाँ पर जो रस है न मतलब आप जिधर भी देखेंगे शायद यह कोई कोना है वो आपको नजर आयेगा एंड इतने श्य में कब जो है हमारी टर्न आएगी, यह बहुत मुश्किल मेरे को लग रहा है फिर भी मैं कोशिश करता हूँ थोड़ा सा कवर करने की और कितना टाइम है, क्या चक्कर है आइये देखते है।
3:25 तो अभी भाई यहाँ पर मिला है जो हमारी वे कहाँ से हैं आप चायबासा झारखण्ड तो आपका नंबर लग गया है कितना टाइम लगेगा
3:32 1 घंटे की वेटिंग है, अभी 1
3:33 घंटा लगेगा 20 नंबर है हमारा आप इंतज़ार करेंगे हाँ करना पड़ेगा, टाइम ना है 1 घंटा भी भाई यहाँ पर इंतज़ार करेगा और लोग 22 घंटे भी यहाँ पर इंतज़ार कर रहे हैं और बहुत डिफिकल्ट है मेरे लिए, डिफिकल्ट है अपना सच बोलू और मेरे को लग रहा है की हम कोई दूसरी डेस्टिनेशन को दुसरे जायका ढूंढते हैं, हो सकता है कोई और भी बेटर हो और क्यूंकी महादेव की ऑलरेडी कृपा इनके ऊपर है तो बेटर
4:00 है कुछ और दिखाए जो बेटर भी हो, अच्छा भी हो और चलिए मिलकर अच्छा लगा आपसे आप इंतज़ार करिए और खाए। दोस्तों लोकल्स यहाँ पर मेरे को मिले थे उन्होंने 1 दुकान मेरे को बताई जिसका नाम है श्री सत्य नारायण स्वीट्स जो बहुत पुरानी दुकान
4:30 है और लोकेशन की बात करूँ राम भंडार से 56 दुकानें पीछे है और यहाँ पर ज्यादातर जो है वो लोकल्स आते है क्यूंकि आज राम भंडार की दुकान बंद है इसलिए कुछ जो टूटिस वो इधर आ रहे हैं वरना बहुत ज्यादा यहाँ पर नहीं होता है। तो आइए चलते हैं यदि हमारा ब्रेकफास्ट नाश्ता श्री सत्यनारायण शरीर हमारा नसी कितनी पुरानी दुकान है सर ये ये 1920 की दुकान है, सौ साल हो गया है, हमारी छपी पीड़ी
5:00 चल रही है, छठी पीढ़ी आ गई है, क्या बात है दी और इसी जगह स हमारे दादा बाबा दादा चली आ रही है और इससे क्या बोला जाता है कचौरी है बड़ी चौड़ी छोटी कचौरी कचौरी दिखाएंगे बड़ी चौड़ी है, कितनी दी जाती है, 2 से होती है, 2 रहते है और इसके बीच में क्या रहता है ये किस के साथ खाई जाती है
5:30 बड़ी चौड़ी सब्जी आलू कचौड़ी के साथ चलती रहती है और मिठाई में क्या खाएं मिठाई में हमारा किस पल तो खाइए हमारा मलाई की लोरी है उसको खाइए खाए सुबह बना चोरी तो बड़े प्यार के साथ इन्होंने बात करी उसके लिए इनका बहुत सर आप भी खाइए सर अभी 1 ही हमारे सा बाद में खाएंगे गर्मा गर्म खा, खिलाएंगे सर 10 मिनट लगे हमें यहाँ पर और हमारा जो नंबर है वो आ गया। अच्छा 1 चीज
5:59 मैं आपको बता सकता हूँ हालांकि मैंने जायका चखा नहीं है लेकिन इनकी कचौड़ी जो दिखने में पूरी जैसी है यह चेक करे पूरी हमेशा ऐसी ही होनी चाहिए एकदम से गोल्ड ब्राउन कलर की जो ये बताती है की अच्छे से के ऊपर से सिखाया गया है, टाइम लेकर बनाया गया है और इसके अंदर क्या रहता है मैं आपको दिखाता हूँ इसके अंदर है जी उड़त की दाल की पीठी है और मेदा जो है वो इस पूरी
6:22 में यूज नहीं होता है यह बहुत अच्छी बात है, सिर्फ और सिर्फ आटा है और इसके साथ आते हैं जी। आलू आलू का घोल रहता है जिसमें हल्के हल्के मटर भी मेरे को लग रहे हैं और साथ में यहाँ की 3 मिठाइयाँ बहुत ज्यादा फेमस है। 1 तो यूपी पुरी में खाया जाता है वो है जी, यहाँ की जलेबी और दूसरी जो है यहाँ की पलंगतोड़ मिठाई है जिसमें मलाई रहती है जिसमे केसर रहता है और
6:48 यह बहुत प्यार और चाव के साथ खाई जाती है। तीसरी जो यहाँ की मिठाई है जिसे मलाई गिलोरी बोला जाता है। अब अनारसी पान तो बहुत ज्यादा फेमस है तो ये भी आप देखेंगे पान की शेप में यह तैयार किया जाता है और ऐसे ही चम्मच के साथ इसे खाया जाता है। और अब शुरुआत करते हैं श्री सत्य नारायण जी की। दुकान के ऊपर हूँ वाराणसी का नाश्ता कचौरी और आलू का क्यूंकी विदाउट
7:19 मेदा है। तो मैं बोल सकता हूँ की आपको पचने में भी ये काफी ईजी रहेगी। अच्छा इनका जो गोल है बह बहुत सही है। हालांकि मेरे को लग रहा है कि इसमें प्याज और सन का इन्होंने यूज नहीं किया है लेकिन इसके बावजूद जो सब्जी है वह बहुत हमदा जो डिसअपॉइंटमेंट थी की मैं राम कोडी नहीं जा पाया, जैसा होता है लेकिन अब वो डिसअपॉइंटमेंट
7:49 दूर हो चुकी है। जय का यहां का बहुत अच्छा
7:52 है,
8:03 वह
8:04 बहुत ज्यादा फ्रेश, बहुत ज्यादा शोक और केसर का अल्टीमेट जो टेस्ट है और साथ में इलायची छोटी इलायची का फ्लेवर जरूर खाना यहाँ का तो भाई लोग भी यहाँ पर आये, किसी ने रिकमेंड किया था हमारी तरह लोकल स ने, लेकिन यहाँ पर आपको डिस्पाइट में नहीं हुई, 1 से बढ़कर 1 बढ़ी है तो भाई जरूरी नहीं है कि हम 2 घंटे इंतजार करें। आपके पास समय है तो आप कर सकते हो। मेरे पास समय की
8:30 कमी थी, हो सकता है बहुत बढ़िया हो लेकिन समय की कमी के कारण में यहाँ पर आया और सच बताओ तो बहुत उम्दा है, मैं रिकमेंड करूंगा आपको अगर लगता है तो यहाँ पर आएगा श्री सत्यनारायण स्वीट 2 दुकाने हैं, इनकी बाजू में वहाँ पर मिठाइयां होती है, यहाँ पर ये सारे बनाई जाती है। राम भनार पहले आती है, उनकी पुरानी दुकान थी और मलाई लोरी के साथ हम इसे खत्म करते हैं और बनारसी पान तो
8:55 अपने आप में मशहूर है लेकिन बनारसी जाम भी बहुत मशहूर है यहाँ पर मैंने देखा है ईवन चलना ही बहुत मुश्किल है यहाँ पर तो गलोरी खाते हैं और चलते हैं हमारी दूसरी मंजिल की तरफ
9:28 आप देख सकते हैं, गुर है मंदिर का सामान है और छटेली बाजार में कुछ दुकानें बची है जहाँ पर ये जो समान है, मंदिर में जो तैयार किया जाता है आपको मिलेगा और ये बनारस की बना हुई
9:41 है, बनारस की बनी हुए है। अच्छा
9:44 यही यही का है, कहाँ पर काम आता है। मतलब मंदिर में जाते है, है अरे वाह ये किस चीज से तैयार है, यह कॉपर पे है, कॉपर
9:55 से चांदी कोटेड होगा अरे वाह कितने
9:57 दिन लग जाते है इसे इसके बनने
9:58 में कम से कम हफ्ते से 10
9:59 दिन तो ये हमारे जो महावीर हनुमान जी थे वो ये ये उठाते थे,
10:05 मानी है हनुमान जी का फेस है,
10:08 वो भी देखिये, अच्छा वो भी है, क्या बात है, ये देखिये, क्या बात है और जितना भी समान है। देखिये ये आपको आम दुकानों पर मिले जय
10:18 बजरंग बली पुरानी है आपकी दुकान हमारी दुकान बहुत पुरानी है, कम से कम मान के चलिए सौ साल पुरानी है क्योंकि आगे हमारी दुकान थी, पहले सौ साल हो, इस दुकान को पहले आगे
10:28 थी, अब यहाँ खुले काशी की ये खासियत है की आप जिस गली में घुस जायेंगे न वहाँ पर आपको ऐसे पुराने लोग। मिलेंगे पुरानी कहानियां। मिलेंगी ऐसी कहानी के बारे में खड़ा हूँ। सौ साल बहुत लम्बा समय है और क्या बात है बहुत बढ़िया यह लीजिये धन्यवाद दोस्तों काशी में आपको ऐसी बहुत सी तंग गलियां मिलेंगी और इन तंग गलियों की 1
10:59 अपनी ही वाइब है और इन्हीं तंग गलियों से होता हुआ मैं ऐसी जगह के बिल्कुल पास कर रहा हूँ कि जैसे ही आप यहाँ पर पहुँचते है, हालांकि दुकान कुछ कदमों की दूरी पर है लेकिन जो जायका है वो लोगों के हाथों में है। मैं बात कर रहा हूँ जी वाराणसी काशी बनारस की, बहुत फेमस श्री जी की, मलाइयों की जो आज से नहीं तकरीबन सौ सालों से चल रही है और दीवान की क्या है आइये
11:23 मैं आपको दिखाता हूँ। ये देखिये ये लाइन लगी हुई है और यहाँ पर जब भी आप आएंगे बस आपको यही हाल मिलेगा
11:31 तो भैया जी ने पीड़िया हो गयी। आपकी में फोर जनरेशन हूँ। सर 4
11:37 पीड़ियों से यही जा रहा है। ये
11:39 हमारे दादाजी हैं जी के पिता जी से यह चीज स्टार्ट हुई है जी और ये लगभग हमारी 120 साल पुराने शॉप है 120
11:47 साल से काशी में मलायो जनमदाता आपही
11:51 का परिवार है। अब आप ये कह सकते हैं क्या होता है भैया मलेयोबसविल्टर में ही मिलती है ये दीवाली से होली तक के लिए जब तक डी पढ़ते है ती क के लिए यह मॉर्निंग में इसको खाया जाता है और ये इसकी टाइमिंग सुबह 8 से हम लोग 2 बजे तक इसको डिलीवर करते
12:06 हैं, कैसे बनाई जाती है इसको दूध
12:08 को उबाल कर के फैला रखे हैं, उसको पढ़ते है फिर इसको मत जाता है जैसे मक्खन मतातेहैआपनेदेखा होगा जी इसमें मलाई डाल कर इसको फेटेंगे जो इसकी मोटी लेयर आयेंगी झा की उसमे गुलाब जल केसर इलायची डाल कर इसको तैयार
12:21 करते ह और ये कितना होगा इस
12:23 बड़ी कड़ाई के क्वांटिटी इसमें आती है।
12:25 पंद्रह से 20 किलो, पंद्रह से 20 किलो। मैं देख रहा हूँ। कुल में
12:28 खिलाया कुल्लड़ में इसका टेस्ट आता है, उसका स्वरूप दूसरा होता है क्या और शुरू से इसका प्रयास यही होता है कि कुल्लड़ में खिलाया जाए और अच्छे
12:37 क्या पहचान है। अच्छे इसकी यही है
12:38 कि जितना हल्का से हल्का हो, यह और टेस्टी होता है और इसकी असली पहचान जी, ये केवल मिल्क और मलाई से बनती है। तो भैया दीजिये जरूर जरूर जी सर इसको खाइए और इसको खाने के बाद आपको सर मिल्क पिलायेंगे
13:03 मिल्क। कोई जितनी बार मर्जी हे वो इच्छा के ऊपर है आपके फाइनली जो है मलाई मेरे हाथ में है और विवान भी क्या है ये बताने की जरुरत नहीं है, लोग इंतज़ार करते हैं 20 मिनट पचीस मिनट। हालांकि जो बाबू जी है उनके बेटे है, उनका जो हाथ है बहुत तेज चलता है वे दिन सेकेंड जो है वो सर्व किया जाता है। अच्छा मलायो की जो रंगत है सबसे पहले चेक करें क्यूंकि इसमें जो केसर है
13:26 उसका रंग डाला जाता है, ड्राई फ्रूट है और निचे पहले दिन से ही यहाँ कूलर में सर्व किया जाता है क्योंकि ये ठंडा रहता है। अब इंतजार करना मुश्किल है, चलिए खाते है जी काशी का, श्री जी का मालायो वाह,
13:58 ये ऐसा जायका है जिसको बस आप जबान के ऊपर रखें और इतना ज्यादा रसीला है, इतना ज्यादा बढ़िया है। केसर का फ्लेवर और हल्का सा ठंडा मतलब। पहली जबान पर रखते ही ऐसा लगता है कि जब आप अपने शहर से विदा लेंगे, मतलब यहाँ से जाएंगे तो इसे मिस करेंगे। मतलब स्वाद की मैं बात करूँ तो अमेजिंग है। हालांकि बहुत जगह पर आपको जो मलायो है ये मिलेगा लेकिन क्वालिटी में लोकल के साथ साथ जो दूर
14:26 से आते हैं उनकी भी यह पहली पसंद रहता है। और बाकी इसमें केसर है, दूर से यह तैयार किया जाता है। अमेजिंग इसका टेस्ट है। अच्छा ये दूध आ गया, बीच में अरे ओ
14:44 तो
14:44 अच्छा और ये फाइनल वर्ग है। और मैं आपको और चीज़ बताता हूँ। ये देखिये, खैर उन्हें तो प्यार से मेरे को उधर ऐसी दे, लेकिन यहाँ पर जो रस लगा हुआ है, न लाइन लगी हुई है। ये देखिये, जो दूध बचता है, उधर से मतलब निकालता है। लोग पहले मलाई खाते हैं और उसके बाद यहाँ पर आकर खड़े होते हैं। जहाँ पर जो दूध है, केसर वाला दूध को दिया जाता है और यह अनलिमिटेड मिलता है।
15:09 आप 2 बार, 4 बार, 5 बार जितनी मर्जी बार ले और सच में मैं भी। दोबारा ऐसी लूंगा, इतना बढ़िया जी, सर देखिये, आप वीडियो देखिये, सर आपने देखे, थैंक यू थोड़ी बहुत बनाते रहता हूँ। अच्छा कहाँ से है सर आप मैं गुडगाँव, ऐसी अरे वाह, बहुत कुछ सहा से मैं, अमृतसर से हूँ। मैंने 12 आपकी फुटवाली धन्यवाद न्यवाद वासा को बोला अरे नहीं नहीं बड़ा
16:03 क
16:16 दोस्तों काशी में आपको तंग तंग गलियां तो मिलेंगी लेकिन उन तंग गलियों में आपको ऐसी प्यारी प्यारी जो भगवान की पिक्चर्स है, वो भी मिलेंगी चित्रकारी मिलेगी पेंटिंग्स मिलेगी। जैसे ये गणपति गणेश जी की बनी हुई है, बोले भंडारी जी की बनी हुई है। और ये देखिए ये मकान है। हालांकि लेकिन इतने खूबसूरत ढंग के साथ जो चित्रकारी वो की गयी हुई है की लोग स्पेशली यहाँ पर आते है और पिक्चर्स लेते हैं, खिंचवाते हैं। अमेजिंग
16:42 बहुत बढ़िया है दोस्तों नाश्ता करने के लिए। अब मैं बड़ी खास जगह पर खड़ा हूँ। जी हाँ मैं बात कर रहा हूँ की कचौरियों की जो छोलों के साथ दी जाती है, कूलर में दी जाती है, और यहाँ के जो दीवाने
17:12 है वो यहाँ के लोकल्स है। बहुत सालों से दुकान भी से नहीं बोल सकते। टेबल के ऊपर 1 स आधा सा सिम्पल सा सेट अप है और कहा जाता है जो लोगों से मेरे को बताया की 30 रूपए का ये नाश्ता वारानसी की बड़ी बड़ी दुकानों के ऊपर भारी पड़ता है। जैश्रीराम जी
17:27 क्या है, कब से लगा रहे है। सर आप। ये आज 28 साल हो गया, 28 साल है, 28 साल हो
17:34 गया तो कचौड़ी मिलती है जी यहाँ
17:36 पर चना कचौरी कचौरी भी बड़ी छोटी छोटी प्यारी परी है, कचौड़ी छोटा छोटा
17:41 है, तब से तो कितना अच्छा लगता
17:43 है देखने में और खाने में भी, खाने में तो और अच्छा लगता है देखने में, तो क्या खाने में भी
17:48 अच्छा और आप दोनो होते है यहाँ
17:50 पर हम लोग 28 साल से यही हम लोग साथ में आप, दोनों साथ
17:53 नहीं होते हैं। और मैं देख रहा हूँ बड़ा प्यारा सा नीट क्लीन सेट अप है, टेबल के ऊपर आपने लगाया हुआ है, टेबल तो आये, लोकस भी
18:00 आते हैं, लोकल भी बहुत आते है, पर भी बहुत जाता है। और ये आ गए ब्लैक चने देखिये तो देसी
18:07 चने का सेट अप देख सकते हैं। और यह यहाँ पर रहा। कुल्लर लगाए जा रहे। और साथ में चटनी कौन
18:14 कौन सी रहती है भैया चटनी मीठा
18:16 टीटा और पिया और प्राइज क्या रहता
18:18 है इसका 30 रूपया ये देखे देखे
18:22 भाई साब इस जगह की जो दीवानगी है न वो अल्टीमेट लेवल की है। यहाँ पर न छोटी छोटी आपको 3 कचौरियां मिलती है, चौड़ी का साइज बहुत ज्यादा छोटा है और कूलर में दी जाती है। ऊपर से चने रहते हैं, प्याज है और चनों का जो रस है वो डाला जाता है। वह कचौड़ी का साइज जितना ज्यादा छोटा होगा न उसमें उतना ज्यादा कसापन
18:52 होगा। वही यहाँ की कचोड़ी में मेर को खास चीज लगी है। बाकी स्प सीन नहीं है, छोले बहुत अच्छे हैं, ग्रेवी बहुत अच्छी है और प्रेजेंट करने का तरीका बहुत अच्छा है। और सबसे अच्छी बात है इतना कुछ अच्छा चीज देने के बाद भी जो प्राइज है वो मात्र 30 रुपए है। यही कारण है जो मेरी समझ में आता है की यहाँ पर इतनी ज्यादा दीवाने है तो ये मेरे को बहुत अच्छी लगी, यह यू कह
19:19 सकता हूँ अब तक जितनी भी चीजें खाई हैं उन में बेस्ट बोलूंगा लोकेशन है। बांस फाटक इस जगह को बोला जाता है। यह सामने बहुत बड़ी दुकान है श्री जलान इम्प्लेक्सकरके उसके ठीक बाहर। इनकी ये कार्ड बोल लीजिए। छोटा सा मतलब सेटअप है टेबल के ऊपर लेकिन यहाँ पर आखिर कचौरी जर खाइएगा इसे खस्ता बोला जाता है।
19:57 कोई भी शहर छोटा हो या बड़ा हो वहाँ पर 1 ऐसा चाय का स्फोट होता है न जो वहाँ के लोगों की लाइफलाइन होता है। ऐसा ही काशी की 1 ऐसी दुकान है चाय की जो इस गली के अन्दर है और तकरीबन 70 80 साल पुरानी है और नाम है जी लक्ष्मी टी स्टॉल मैंने सुना है की यहाँ की चाय, यहाँ के टोस्ट और टोस्ट भी आम नहीं होते हैं। 3 से 4 तरह के होते हैं
20:20 और दीवान की क्या है। आप देख सकते हैं तंग रचता है। और वह पहुँच गए जी हम हर महादेव, हर हर महादेव लक्ष्मी। किसका नाम था हमारे, पिताजी का नाम है, पिता, जी का नाम है और कितना पुराना दुकान है 90 साल पुराना, 90 साल पुराना हो गया तब से इसी ढंग के साथ चल रहा। तो क्या क्या होता है सर हमारे वाइट बटर मूल बटर मलाई टोस, ये वाइट बटर आ गया, अच्छा अमूल आ गया।
20:47 वो तो 3 तरह के अलग अलग टोस् बनाये जाते है।
20:51 1 सिजेरियन होता है ब्रेड के अन्दर
20:52 फाड़ कर डालते है, उसको क्या बोलते
20:54 हैं, सिजीरियमउसकोकहते है अच्छा उसका ऑपरेशन कर
20:57 देते हैं। हल्का सा है और मैं देख रहा हूँ दूर के ऊपर गर्म
21:00 किए जा रहे है, टेस्टी होता है,
21:03 टेस्टी होता है। तो पूरे काशी में बाबा की इतनी कृपा है की चाय पीनी है तो लक्ष्मी जी के पास
21:09 चले जाये। पसंद के ऊपर है, फ्रेम
21:11 के ऊपर है अरे, वह तो भैया ने बोल दिया स्टार्ट ये लीजिये और वाइट की अमूल भैया वाइट वाला खिलाइए, ये लीजिये खाते रहते हैं। अच्छा देसी मन है, ये लीजिये, देसी मक्खन है। 22 प्लेट, हाँ भैया 22 प्लेट। तो वाइट जो बटर है वो यहाँ पर जो ज्यादा डिमांड में रहता है, क्योंकि अमूल तो हर जगह पर मिल जाता है। तो मैंने ये लीजिये आपको सौल डालना हूँ, मै अच्छा सोल्ड ऊपर से ये अलग से
21:36 डालिए। ठीक है जी आपको 2 मलाई देंगे। अब मलाई वाला बनाइए ये लीजिये, ये आ गया 1 में चीनी लगा दीजियेगा जी, जी, जी, ये लीजिये। देखिये सिजेरियन ऑपरेशन है ब्रेड का ये डबल सिखाएगा, अच्छा ये दोबारा उधर जाएगा, जो सिजेरियन है ये बाबू जी ने दूसरी दोबारा से। ऐसे देखा जा रहा है कोयले की आंच के ऊपर तो पहले ऑपरेशन किया और अब उसे गरम कर रहे हैं। आप
22:06 इसको पहले खाएगा और सबसे पहले इसे ट्राई करते हैं सिजेरियन को और ऊपर से नमक भी लगाया जाता है। जो खास है न वो यहाँ का मखन है। अब ब्रेड तो हर जगह तकरीबन 1 जैसी होगी लेकिन कोयले की भट्टी के ऊपर देखा गया उसका 1 हल्का सा की फ्लेवर काफी अच्छा है। यह आ गया जी मलाई वाला चीनी के साथ, यह मेरे लिए नोस्टालजिक
22:37 मूवमेंट है और काफी बेहतर है। चाहे वो मक्खन है, चाहे मलाई है, मच मच बेटर है यहाँ पर और लक्ष्मी टी स्टॉल जो है ये 24 घंटे में से ज्यादातर घंटे, ये खुला ही रहेगा, केवल कुछ 56 घंटे। यह बंद रहता है यहाँ पर, मॉर्निंग में आयेंगे शाम को आयेंगे दश्य से ही मिलेगा। हालांकि यहाँ पर कुल्लड़ रहता है लेकिन आज कुलर नहीं खत्म हो गए। तो इसी के साथ पीते हैं जी। लक्ष्मी टी स्टाल की
23:01 वाराणसी की मोस्ट फेमस
23:02 है,
23:06 चाय कड़क है, मीठा थोड़ा सा हल्का है, मैंने बोला था, हो सकता है इससे बेहतर और भी हिडन प्लेसेज हो होंगे तो मेरे को जरूर बताइएगा। ऐसा स्पोर्ट है की आप इसे मिस नहीं कर सकते, इसकी वाइप को मिस नहीं कर सकते। चलिए से फिनिश करता हूँ। मेरे साथ 2 भाई और भी है आयुषवाईहैं जिन्हें आप जानते ही हैं और साथ में है हमारे आनंद। भाई, आनंद भाई हैं और इनके चैनल भी है। भैया को तो
23:28 ट्रेन राइटर और भैया टेक्निकल बनता तो ये हमारे साथ ही रहेंगे। ठीक है भैया आपकी चाय की तर है, अच्छा ये चाय नहीं पीते, कहते है की रंग सावला हो जाता है। यही कारण है चलिए। दोस्तों अभी हम पहुंचे हैं वाराणसी के 1 बहुत फेमस रेस्टोरेंट में, जिसका नाम है भाटी चौका, रेस्टोरेंट भाटी चौका अपने आप में यूनिक ट्रेडिशनल थीम
23:58 रेस्टोरेंट है जो कि उत्तर प्रदेश पुर्वांचल का जो कल्चर है वो दर्शाता है और यहाँ पर 2 बिल्डिंग हैं, 1 मेरी राइट साइट पर बनी हुई है जहाँ पर चेयर टेबल बने हुए हैं वहाँ पर बैठकर खाने का मजा ले सकते हैं वहीं जो दूसरी बिल्डिंग है इसके अन्दर आज भी पुराने समय में जैसे खाना खाया जाता था वैसे बिठा कर खाना खाया जाता है और एंट्रेंस के ऊपर ही आप देख सकते हैं जो नगाड़ा है
24:22 वो बना हुआ है और यह जरूरी है बजाना और ये आप देख सकते हैं मटकियों के बीच में शायद इससे पहले यहाँ पर सब्जी बनाई होगी, इधर उपले पड़ी हुई है। तो पुराने समय में जैसे फूड जो है वो तैयार किया जाता था। ये सारे का सारा वही दर्शाता है आइये अंदर चलते हैं अरे वह तो चटनी बन रही है कौन सी है धनिया
24:52 वाली धनिया मिर्चा अदरक और वही दूसरी तरफ मेरे पीछे मैं देख रहा हूँ बहुत सी चक्की है जो हाथ से चलाई जाती है जिसमें अभी जो है चने से, चोलों से जो है वो सत्तू तैयार किया जा रहा है जिससे जो भी है वो तैयार की जाएगी। अरे वाह तो यहाँ पर मंथन भी है जिससे जो है जिसे हम बोलते हैं और और भी बहुत से नाम है से दिए जाते हैं वो तैयार किया जाता है
25:19 और सच में जैसे ही में दाखिल हुआ हूँ सारा कुछ ऐसा लग रहा है की मैं किसी गाँव में आ चूका हूँ और ये शायद मसाले के लिए है अच्छा दीदी बोल रहे हैं इसे कुछ देसा करके बोला जाता है जिससे जो मसाला है वो कूटा जाता है जैसे अभी इसके बीच में हल्दी है तो पैर के साथ इसे ऐसे दबाया जाता है और जोर जोर से ऐसे करेंगे तो वो है 1 दम से उसका चूरा
25:47 हो जाता है। तो यहाँ पर दिखाया गया है कि कैसे पुराने समय में गाँव में जो हमारा कल्चर होता था और शायद अन्दर भी कुछ है वह बाबा ये क्या बनारसी साड़ी वह तो बाबा यहाँ पर बनारसी साड़ी बना रहे हैं और मैं देख रहा हूँ सिर्फ 1 कारीगर नहीं है बहुत कारगर यहाँ पर बैठे हुए हैं, क्यूँकी बनारस की बनारसी साड़ी बहुत ज्यादा फेमस है तो यहीं पर जो है वो धागे के
26:17 साथ आप देख सकते हैं बाबा जो है वो बनारसी साड़ी बना रहे हैं तो कहाँ पर बेची जाती है ये अच्छा अंदर दुकान भी है तो टूरिस् यहाँ पर आते हैं, देखते हैं कैसे तैयार किया जाता है और अंदर से खरीदते हैं खैर अभी भूख लग पड़ी है, ऊपर चलते हैं और मजा लेते हैं बाटी चौका के बाटी चौका खाने का, तो भाई मेरे हाथ में न बड़ी खास चीज है। आप सोच रहे होंगे ये क्या
26:39 है ये है जी, यहाँ का मैन्यू कार्ड है जिसमें डिफ्रेंट डिफ्रेंट जो है, कॉम्बो ऑफर है, जैसे बनारसी का है, स्पेशल बाटी चौका है, खिचड़ी है, रोटी थाली है, दाल पूरी थाली है। तो थ्री सेवंटी फाइव वाली जो स्पेशल यहाँ का बाटी चौका है जिसमे बहुत कुछ है बाकी, आएगा, मैं, आपको बताऊंगा तो फिलहाल यही हम खाते है थ्री सेवंटी फाइव चौका। तो 2 तरह की जो चटनी है सबसे पहले वो डाली गई है तो सर्विस
27:04 जो है वो थोड़े थोड़े अंतराल के बाद आती है जैसे आप देख सकते हैं ये भैया है। तो इनकी जो ड्यूटी लगी हुई है वो चटनी के ऊपर लगी हुई है। तो अभी चोखा आ रहा है। चोखा जो चोखा है ये बैंगन रहता है, इसमें मटर रहते हैं और इसमें आलू रहते है। ये क्या है भैया, ये दाल की पकौड़ी है, दाल की पकौड़ी, दाल पनीर पकोड़ा, ये
27:34 फरा है ये किस चीज का रहता है आटे चावल के आटे का और रत की दाल का, तो 1 तरह का स्नैक्स है, ये बोल सकता हूँ मैं दल कौन सी दाल उड़द की, ये पनीर पनीर की भाटी पनीर है, ये सत्तू की है और बाहर आता रहता है इसके इसके बाहर आता जी, देसी घी, अरे, वह तो देसी घी है जो ऊपर डाला जाता है बाटी के ऊपर और दाल के बीच में ही, तो शुरू
28:04 करते है जी। भई स्नैक्स बहुत अच्छी है, चाहे मगोडी हो, पनीर का पकोड़ा हो या फिर फरा हो, खासकर ऐसी इनकी चटनी है जो हमने नीचे देखी भी थी जो दीदी बना रही थी बहुत ज्यादा है। अब खाते हैं जी बाटी और ये देखिये सबसे पहले इसके बीच में जो फीलिंग है ये सत्तू है जो की बिहार की या पूर्वांचल की, डिश बोल सकता हूँ और इसे लेते हैं जी, हम
28:35 इसे चौके के साथ हम खाएंगे मैं गल्ती करने लगा था, ये है जी, वह अब लेते हैं जी जो पनीर वाला है, फीलिंग काफी अच्छी करी गई है, बीच में प्याज है, धनिया है, हरी मिर्च है, इसे लेते हैं जी। हम उड़त की दाल के साथ डेशिकी बहुत ज्यादा है इसमें जितनी भी चीजें मैंने यहाँ पर खाई है न,
29:05 थ्री सेवंटी फाइव रुपीज तो है इसका जो प्राइस है लेकिन 1 बात है 1 तो फूल हैं मतलब अनलिमिटेड आप खा सकते हैं कोई भी चीज सेकेंड जो है माहौल अच्छा है, थर्ड है जैसा निचे उन्होंने सेट अप कर रखा है आपको 1 एक्सपीरियंस भी मिलता है कल्चर का यूनिक टीम है तो कुल मिला के ये मस्त विजिट बेसिस में आज की तारीख में है आप अपनों के साथ आइए पर बंदे की मतलब यहाँ पर एंट्री
29:30 होती है, आप शेयर नहीं कर सकते तो चलिए इसे में खत्म करता हूँ और दोबारा से आपको मिलता हूँ
30:02 a ba दोस्तों अभी मैं पहुँचा हूँ वाराणसी की बहुत फेमस चार्ट की दुकान है नाम है दीना चाट और मेरे ठीक पीछे आप देख सकते हैं कितना ज्यादा रश है और ये दीवानगी मतलब आप साल के 365 दिन अगर यहाँ पर आयेंगे तो यही दीवानगी रहेगी और पता लगा है की यहाँ पर 4 से 5 तरह की जो चार्ट है वो मिलती है जिसमे आलू टीकी चार्ट रहती है लेकिन यहाँ की जो फेमस है, वो टमाटर
30:27 चार्ट है, कैसे बनाई जाती है। आइये देखते है तो मेरे सामने जो ऑनर है दीना चाट के वो भाई साब। तो भैया कितनी पुरानी है, कितनी पीढ़ी हो चुकी है और क्या क्या मिलता है थोड़ा बता दे ये
30:36 तीसरी पीढ़ी है, थर्ड जनरेशन है है। और यह दुकान लगभग 50ी साल पुरानी हो गई है। एट फाइव रस और
30:41 क्या क्या होता है। कितनी तरह की
30:42 चार्ट चार्ट तो बहुत है, इससे पानी हो गए, गप्पे दही हो गए है। आलु डिग्री चार्ट है, टमाटर चार्ट है, पालक चार्ट है, पापी चार्ट है, बास्केट चार्ट है, चूहा मदर गुलाब जामुन है, मलैया है, पुल है, दही बड़ा है, टमाटर टमाटर होते है, आलू होते हैं और 1 च होती है और नीबू होती है, भी होती है। और हमारा मा ग्रेवी होता है जो उसका मन होता है। जो कोई न ता है,
31:03 मावा की ग्रेवी होती है, वही
31:07 उसको डालते है। तो आपस में लड़ता है
31:10 तो उसे पेश आता है उसका स्वाद ता वागत दीवानगी का क्या कारण है।
31:14 इतना 1 बार खाते है। तो जैसे आप हैं आप तो 1 बार जो खाता है उसके स्वाद लग जाता है। और बार में जो स्वाद मिलता है
31:22 वो कहीं नही मिलता है, कहीं नहीं मिलता देख सेटअप पुराना है, कुछ नया
31:27 नहीं है, कुछ लुक है, वो लोग खाते है। ये क्या खिला खिला सको हाइट करेंगे। तो समय की क्या क्या
31:34 है। क्या नहीं है तो फाइनली जो है डीना चार्ट की टमाटर चार्ट मिल चुकी है, कुल्लड़ में ये सब की जाती है 60 रूपए की कीमत रहती है। तो लेट मी चेक, आउट क् ऐसा है दी, दीना चाट की बहुत ज्यादा फेमस टमाटर चाट भाई बात तो
31:58 है,
32:00 खट्टा जायका है, हल्का सा मीठा जायका है, हल्का सा तीसरा जायका है। और वाराणसी में कड़ाके की इस ठंड में मैं समझता हूँ कि शाम को इससे बेहतर यायिका नहीं हो सकता। कुल मिलाकर ये सच में बहुत सही है, वाराणसी में आते हैं ये जरूर खाइएगा रेस जो है इंतेजार थोड़ा करना पड़ेगा क लीजियेगा नाम हैदी दीना।
32:43 तो पप्पू जी किसका नाम है, जी, पिताजी का नाम है। और कितना पुराना टीसटोलहैंये करी वही 80, 90 साल, 80 से 90 साल। और मैंने देखा अभी आपने जो नॉर्मल चाय रेडी किया वो भी बड़ी देर लगा कर अच्छे से पकाकर बनाते है। तो ऐसे बनाई जाती है यहाँ
33:00 पर, जी हमारे दादाजी खुले, उसी बना
33:03 कैसे बनाई जाती। और अब ये कौन सी बन रही है जी, ये लेमलटीबनेगीसिर हमारी वो हाजमोला वाली बनाई है, वही बन रही है। तो हाज मूला किसने शुरू किया ये ये इसमें इसे लोग
33:14 नमक डालते हैं, सब हमलोग हाजमोला डालते हैं, टेस्ट के लिए है सबसे हाजमूलासाहीपगतो,
33:19 कुछ हाज मूला चाय है जो यहाँ पर भैया बना रहे है। तो भैया बताते रहियेगा क्या क्या रहे है उसमे अभी अदरक डाले, अच्छा अदरक भी जायेगा
33:27 उसमें है और मिल भी जायेगा अदरक
33:30 जा रहा है। भैया जो है पुदीना डाल रहे हैं। इससे पहले मैंने कहीं पर भी हाजमोला चाहे। नहीं पी है, वो मिलती है 80 घाट वाराणसी में टी स्टाल पर, अब उसमे जा रहा है, जो पत्ती का पानी होता है, वो जा रहा है। अब जा रहे जी, इसमें निम्बू का रस, अब आ गई। जी हाजमोला अच्छा, ये ऑलरेडी क्रश है की हुई है आपने जी और कीमत कितनी रहती है भैया, इसकी पंद्रह रूपए, पंद्रह रूपए
33:55 जी, ये की जा रही है। तो बना देते है। हाजमोला देखकर। उन्होंने बोला यही पीएंगे क्यूँकी ये नहीं मिलती कहीं और यह मिलती है। तो 80 घाट पर वाराणसी पप्पू जी के टी अच्छा ये आ गई। अरे वाह मोदी जी भी यहाँ पर आये तो मोदी जी के अन्दर जो है पिक्चर लगी हुए, साथ में आप ही हैं। अच्छा आप आपने बनाकर पिलाई को कितनी चाय पी उन्होंने, वो नॉर्मल है ये वाली अरे, वह तो भैया
34:23 ने अन्दर जो है, फोटो फ्रेम करी हुई है हमारे देश के प्रधान मंत्री प्राइम मनिस्टर नरेंद्र मोदी जी भी यहाँ पर आकर चाय पी है। हाजमोला चाय ठंड हो चुकी है। तो लेते हैं हाजमोला चाय। पपूपीसौलअच्छीघाट वाह भैया चाय नहीं से बोल सकता मैं इसे चटपटा जायका बोल सकते हैं। अपने आप में,
34:53 मतलब चाय भी है। लेकिन हाजमोला का फ्लेवर हल्का सा मीठा फ्लेवर क्योंकि नींबू डाला गया है उसका खट्टा फ्लेवर और अदरक का जायका। कुल मिला के यह ऐसा जायका है कि अगर आपको मेरे को ऐसा लग रहा है, तकावट हुई है या सर्दी हो रखी है उसके लिए ये बेस्ट 1 तरह की मेडिसिन है। तो हल्के हल्के पीने में मजा आयेगा। दोस्तों इस समय में लंका में हूँ और
35:24 लंका में पान की 1 बहुत पुरानी और प्रसिद्ध दुकान है जो मेरे ठीक पीछे है जिसका नाम है केशव तामूल पान भंडार और कहते है की बनारस में आकर बनारसी पान खाना तो बनता ही है। तो भैया बनता ही है,
35:38 बिल्कुल भाई बनारस है और पान न खाए तो क्या खाक बनारस है। और जिस दुकान पर अभी हम लोग हैं, ये दुकान काफी ज्यादा पुरानी है। और मोदी जी ने भी यही से पान खाया था। उसके बाद इसकी पॉपुलरटी तो यहाँ पहुँच गई और कहा जाता है की अनिल अनंदअमानीकीशादी में मुकेसंबानीकेयहाँ भी इनको बुलाया गया था। इनवटेशनइनहीकापान का स्तेमाल वहाँ
35:57 लगा हुआ चलिए खाते हैं जी। बनारस में बनारसी पान चलिए। तो बनारसी पान में क्या खास होता है कि बनारस के साथ पान का नाम जुड़ा हुआ
36:05 है। ऐसा है और पैदा होता है तो हरा होता है जी, बनारस में कुछ पैदा नहीं होता, बनारस में इसको सफ़ेद करने की कला होती है जी। ये सफ़ेद होता है तो इसका कसाव खत्म हो जाता है, इसमें मिठास जाता है, यह मिठास जाता है तो इसीलिए बनारसी हो जाता है। क्या बात है
36:21 तो गाने भी तो बने हैं खाइके
36:23 पान बना तो उसी में तभी तो न।
36:27 तो ये क्या क्या मिला रहे है। प्लीज बता दीजियेगा। ये देखिये जो
36:31 पान का पत्ता है, कत्था है, सूना है, सुपारी है, पाली है, ठीक है।
36:35 ये सब चीजें हमारे लिए मीठा बना
36:37 रहे है। मीठा बना रहा हूँ जी
36:40 ये कथा आ गया बीच में है,
36:41 ये कथा है, इसका पेड़ होता है, इसके छाल से तैयार होता है। ये टोटल हर्बल चीज है और कोई भी बिना कोई केमिकल नहीं है और मोदी
36:51 जी भी यहाँ पर आये है सिर
36:53 हाँ सर मोदी जी का जो 14 में जब पहली बार चुनाव लड़े थे तो मैं मोदी जी के जी, मोदी जी के साथ जो है भोजन हुआ संकुल में, फिर 19 को फरवरी, 19 को संवाद के लिए बुलाये थे। हाँ
37:08 तो उस समय का वो फोटो अच्छा अरे वह तो वो पीछे फोटो में लगा हुआ है जब पान खाया तो
37:13 क्या बोला सब दम, गदगद तो जो दिमाग खुल गया। जब भी आते हैं मोदी जी बनारस में रुकते हैं तो पानी पान खाते है क्या बात है
37:24 तो हमारे देश के प्रधानमंत्री भी इनकी दुकान के, इनके हाथ से बने पान के दीवाने हैं। और अब देर नहीं लगाते क्यूंकी हमारा पान बन चूका है और गाना याद आ रहा है के पान बना वाला खुल जाए बंद कल का कल का ताला अरे उन्होंने भी यही खोला ताले खुल गए तो खाने
37:40 के बाद आप जो जो महसूस करे तब तो हम समझे
37:52 इसको खाया भी जाता है। 1 साथ जी 1 बार
37:55 में
38:12 बाबू जी मेरे को बाबू जी को पता है मैं पंजाबी बनता हूँ पान बहुत कम खाता हूँ उन्होंने ने 1 बार बताया ये खुलते होले नहीं है की आप जल्दी जल्दी चा रहे हो, साइड में रखिये हल्का दबाइए उसका रस लीजिये और सच में अब अमिताभ बचन वाली आवाज मुँह से निकाल रही है और गाना आप गुनगुना दे
38:36 वाला
38:37 खुल जाए। बंद ताले खुल गए, बाबू जी ताले खुल गए, मज़ा आ गया। दोस्तों, अभी हम पहुँचे हैं 80 घाट पर जहाँ पर रोजाना, सुबह और शाम को बहुत भव्य गंगा मैया जी की आरती होती है। आरती खुशी शनों में शुरू होने वाली है साढ़े 6 बजे अभी का जो टाइम है वो आरती
39:07 का है, आधे घंटे की आरती रहती है और गंगा मैया तेज है हर हर महादेव जय श्री राम के जो नारे हुए गूंज रहे हैं ये सच में हम दोनों के लिए 1 बहुत ही भव्य एक्सपीरियंस है और हम दोनो की कोशिश है की हमारे साथ आपको भी इस भव्य आरती के जो नजारा है वो जरूर दिखाएं
40:46 दूसरे लोगों के तन में विश्व कून के पलों की तलाश में इस समय गंगा मैया के घाट पर आ हूँ और मेरे ठीक पीछे आप देख सकते है। बहुत से लोग है लोग यहाँ पर बैठेंगे निहारेंगे गंगा मैया को ठंडी ठंडी हवा चल रही है और सकून के पलों को जीएंगे और सच कहूँ सुबह से शाम हो गई, शाम से रात हो गयी और बनारस काशी वाराणसी जो मर्जी ऐसी बोलिए यह सिर्फ 1 शहर नहीं है
41:11 यह 1 सा है और गंगा मैया के जो घाट है ये अपने आप में 1 लिवाज है और यहाँ के जायके ही नहीं लोग भी लाजवाब है और मेरे पास और शबद नहीं है इस शहर के लिए मैं कल भी यही हूँ। दमन भाई की और मेरी आज ये दोनो की और हमारे साथ आनंद भाई की और आयुष भैया की ये सभी की कोशिश रही की हर पहलू से आपको रूबरू करे जो पहलु बच गए हैं,
41:32 कहानियां बच गयी है उनसे आपको कल हम रूबरू करेंगे तब तक के लिए अपना ख्याल रखियेगा और प्यार दीजियेगा लव यू आल।
Summary
- Varanasi, also known as Kashi or Banaras, is famous for its cultural heritage and the Ganges River.
- The speaker visits the Kashi Vishwanath Temple, noting its significance and the long lines of devotees.
- Local delicacies like kachoris and sweets from historic shops are highlighted, including a visit to Shri Satyanarayan Sweets.
- The speaker discusses the popularity of various traditional snacks and sweets, emphasizing their historical roots.
- The experience of waiting for food at popular spots reflects the local culture and the value placed on traditional cuisine.
- The video features a visit to Bhati Chokha, a restaurant that showcases traditional Uttar Pradesh cuisine in a culturally immersive setting.
- The speaker also highlights the famous Deena Chaat shop, known for its unique tomato chaat and other varieties.
- The video concludes with a serene experience at the Ganges, capturing the spiritual essence of Varanasi and its vibrant atmosphere.
Questions Answered
What is Kashi known for?
Kashi, also known as Varanasi or Banaras, is one of the oldest and holiest cities in India, famous for its culture, history, and beautiful ghats along the Ganges River.
What should visitors know about visiting the temple?
Visitors to the Shri Kashi Vishwanath Temple should be aware that photography is not allowed inside, and there may be long waiting times to enter, depending on the time of day.
What are some must-try local dishes in Varanasi?
Varanasi is famous for its kachoris served with chole, which are popular among locals and visitors alike. The dish is known for its affordability and delicious taste.
How is traditional food prepared in Varanasi?
Traditional food in Varanasi is often prepared using methods that involve hand-operated machinery, showcasing the local culture and culinary practices.
What is a unique beverage to try in Varanasi?
Hajmola tea, made with ginger and mint, is a unique beverage available in Varanasi, known for its refreshing taste and digestive benefits.